रांचीः झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों और विधायकों के बीच जारी विवाद को लेकर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में बैठक हुई। मंत्री और विधायकों के बीच जारी विवाद फिलहाल सुलझता नजर आ रहा है। पार्टी आलाकमान द्वारा मंत्रियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे कार्यकर्ताओं की बात सुनें, किसी की अनदेखी नहीं करें।
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दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष के आवास पर आयोजित बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने यह भी कहा कि पार्टी के मंत्री-विधायक कार्यकर्ताओं की सुनें। कार्यकर्ताओं की वजह से ही वे विधायक बन कर आए हैं। दूसरी ओर, विधायकों से भी उम्मीद की गई है कि वे पार्टी फोरम पर अपनी बातों को रखें और इसके लिए प्रभारी के माध्यम से केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी बातों को पहुंचाएं।
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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों और विधायकों को समन्वय बनाकर काम करने काे कहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी शिकायत दिल्ली आकर नहीं करनी है। सारे मामलों को प्रदेश स्तर पर प्रभारी, विधायक दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रखें और उनका निबटारा भी वहीं कर लें।बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि उन्होंने और अन्य प्रतिनिधियों ने केंद्रीय नेतृत्व को राज्य में किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने पेसा एक्ट लागू होने को बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि महागठबंधन की सात गारंटी में पेसा एक्ट को लागू करना भी शामिल था।
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परंपरागत, रुढ़ीवादी और कस्टमरी लॉ को आधार बनाकर यह एक्ट बना है। इससे पहले जनजातीय क्षेत्र में मानकी, मुंडा तमान लोगों से मिलकर राय ली गई। यह एक्ट अन्य राज्यों से कहीं बेहतर है। दूसरी ओर, उन्होंने दावा किया कि झारखंड में कोई विधायक नाराज नहीं है। बैठक के दौरान कांग्रेस के कार्यक्रमों और संगठन सृजन पर चर्चा की गई। मनरेगा के पक्ष में चलाए जा रहे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है।बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेनुगोपाल, झारखंड प्रभारी के. राजू, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, उप नेता राजेश कच्छप, मंत्री राधाकृष्ण किशोर, इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की, सांसद सुखदेव भगत, कालीचरण मुंडा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और प्रदीप बलमुचू मौजूद थे।




