Ram Mandir Dhwajarohan : भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या मंगलवार को एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनेगी। 22 जनवरी,वर्ष 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के एक साल 10 महीने बाद 25 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य शिखर पर भगवा धर्म ध्वज फहरायेंगे।
इसके साथ ही राममंदिर की पूर्णता का संदेश भी अयोध्या से पूरे देश को जाएगा। विवाहपंचमी पर होने वाले इस विशाल भव्य आयोजन की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अयोध्या ध्वजारोहण के लिए सजधज कर तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोमवार को एक-एक तैयारियों को खुद देखा और आवश्यक दिशानिर्देश भी दिए।
पांच सौ वर्ष पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का स्वप्न साकार हो गया है। कुछ ही घंटों के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के साथ यह पूर्णता को प्राप्त होगा। इस बीच जन्मभूमि आंदोलन की यादें ताजा हो चली हैं। जन्मभूमि को लेकर लंबा संघर्ष चला लेकिन 22 दिसंबर 1949 की रात रामलला के प्राकट्य के बाद मामला फलक पर आ गया। परिसर से मूर्ति को हटाने का आदेश हुआ लेकिन जान विरोध के कारण यह सफल न हो सका।
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रामलला के प्राकट्य के साथ वर्ष 1950 में जन्मभूमि-बाबरी विवाद को लेकर फैज़ाबाद की अदालत में गोपाल सिंह विशारद ने पहला मुकदमा दायर किया और पूजा-पाठ जारी रखने का आदेश दिए जाने की मांग की। 16 जनवरी 1950 को कोर्ट ने उन्हें पूजा का अधिकार दे दिया।
जमीन के स्वामित्व के लिए वर्ष 1959 में निर्मोही अखाड़े और वर्ष 1961 में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड की ओर से वाद दायर किया गया। सात अक्तूबर 1984 को सीतामढ़ी बिहार से जन जागरण रथयात्रा निकली लेकिन तीव्र आंदोलन की नींव वर्ष 1984 में दिल्ली में आयोजित रैली में रामजन्मभूमि मुक्ति का संकल्प के साथ पड़ी।

रामजन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन
आंदोलन के लिए रामजन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन किया गया। इसके बाद संघ के आनुसंगिक संगठन विश्व हिन्दू परिषद को कमान दी गई और साधु-संतों की अगुवाई में चरणबद्ध आंदोलन चला। कभी शिलादान तो कभी कारसेवा की घोषणा की गई।
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इस बीच एक फरवरी 1986 को जिला अदालत ने विवादित स्थल का ताला खोलने का आदेश दिया। इसके बाद 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने शिला पूजन कर इस आंदोलन को देशव्यापी बना दिया। साथ ही मंदिर के लिए पत्थर तराशी का काम शुरू कराया गया। नौ नवम्बर 1989 को राम मंदिर के शिलान्यास का निर्णय लिया गया।
आडवाणी की रथयात्रा और कारसेवा
कारसेवा की घोषणा के बाद गुजरात से लाल कृष्ण आडवाणी रथ यात्रा लेकर निकले तो सियासी बयानबाजी में माहौल गरमा गया। बिहार में रथ रोका गया और 30 अक्टूबर को गोलियां चलीं। कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में 6 दिसंबर 1992 को फिर से कारसेवा की घोषणा हुई तो उत्साही कारसेवकों ने ढांचा ध्वंस कर दिया। वर्ष 2010 में लखनऊ हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और विवादित परिसर को तीन हिस्सों में बांट दिया।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को पूरी जमीन हिंदुओं को देने और मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया। पांच फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ और पांच अगस्त 2020 को मंदिर का भूमि पूजन किया गया।
मंदिर में गर्भगृह के निर्माण के बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। पांच जून 2025 को राम दरबार व शेषावतार समेत परकोटे के छह मंदिरों में मूर्तियों की स्थापना ,27 अक्तूबर 2025 को राम मंदिर के शिखर समेत आठ मंदिरों पर कलश स्थापना हुई और अब मंगलवार को ध्वजारोहण हो रहा है।
ऐसे चला आंदोलन
1. राम मंदिर का शिलान्यास – नौ नवम्बर 1989
2. राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला – नौ नवम्बर 2019
3. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन -पांच फरवरी 2020
4. राम मंदिर का भूमि पूजन – पांच अगस्त 2020
5. रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा – 22 जनवरी 2024
6. राम दरबार व शेषावतार समेत परकोटे के छह मंदिरों में मूर्तियों की स्थापना – पांच जून 2025
7. राम मंदिर के शिखर समेत आठ मंदिरों पर कलश स्थापना- -27 अक्तूबर 2025
8. ध्वजारोहण समारोह – 25 नवम्बर 2025
अनुष्ठानों की आज पूर्णाहुति, प्रधानमंत्री करेंगे पूर्णता की घोषणा
अयोध्या के राममंदिर में शिखर ध्वजारोहण के लिए पिछले मंगलवार को चार दिनों से चल रहे अनुष्ठान मंगलवार की सुबह पूरे हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन अनुष्ठानों की पूर्णाहुति करेंगे। इसके बाद साढ़े 11 बजे के बाद अभिजित मुहूर्त में ध्वजारोहण कर राममंदिर निर्माण के पूर्णता की घोषणा करेंगे। राम मंदिर के अलावा सात अन्य मंदिरों के ध्वजारोहण का भी अनुष्ठान इसके साथ पूरा किया जाएगा।
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