पलटने में नीतीश कुमार का सानी कोई नहीं,लेफ्ट-राइट सेंटर हर जगह हो जाते हैं फिट!

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January 25, 2024

बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन, चुनाव से पहले नीतीश कुमार की एक और बड़ी घोषणा

कभी उपेक्षा, कभी हार का मलाल, कभी अंतरआत्मा की आवाज तो कभी परिवारवाद बिहार के नीतीश कुमार और लालू यादव की दोस्ती-दुश्मनी के इर्दगिर्द ही बिहार की सियासत की कहानी पिछले तीन दशकों से घूम रही है । कभी नीतीश की चली तो कभी लालू की । इन दोनों दिग्गज समाजवादी नेताओं की सियासत में अतंर सिर्फ इतना ही है कि लालू यादव ने कभी बीजेपी का दामन नहीं थामा लेकिन नीतीश ने बीजेपी का ना सिर्फ दामन थामा बल्कि दुश्मनी भी उसी शिद्दत से की । 1985 में पहली बार विधायक बनने से लेकर अभी तक नीतीश कुमार की हर चाललगभग कामयाब ही होती रही है । जेडीयू को उन्होंने ना सिर्फ खड़ा रखा बल्कि दिल्ली की सियासत में हैसियत भी बनाए रखी ।  बहरहाल एक नजर डालते हैं जब नीतीश कुमार ने कब-कब पाला बदला

1994 में नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान कुर्मी अधिकारी रैली की और जनता दल से अलग हो गए
जॉर्ज फर्नांडिस, ललन सिंह के साथ मिलकर समता पार्टी बना ली
1995 में लेफ्ट के साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन खास कामयाबी नहीं मिली
नीतीश ने सीपीआई से गठबंधन तोड़ कर एनडीए का दामन थाम लिया
बीजेपी के साथ नीतीश का राजनीतिक नाता 2012 तक चला
2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के साथ ही विधानसभा चुनाव लड़े
2012 में बीजेपी में नरेंद्र मोदी का कद बढ़ता देख 2014 में अकेले चुनाव लड़े
जेडीयू को सिर्फ दो सीटें ही मिली पाई और नीतीश ने इस्तीफा दे दिया
2015 में लालू यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़े और फिर मुख्यमंत्री बने
2017 में नीतीश कुमार की अंतरात्मा का हवाला देकर गठबंधन तोड़ दिया
बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली और मुख्यमंत्री बन गए
2020 में बीजेपी के साथ ही विधानसभा चुनाव लड़े और फिर सीएम बने
हांलाकि 2020 में नीतीश की पार्टी को 43 सीटें मिलीं, बीजेपी को  74 और आरजेडी को 75 सीटें
2022 में नीतीश कुमार ने फिर पलटी मारी और बीजेपी के साथ असहज महसूस करने लगे
बीजेपी के साथ रिश्ता खत्म कर दिया और फिर आरजेडी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बन गए

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… तो नीतीश कुमार की राजनीतिक कथा पलटू राम वाली ही रही है । बहाना हर बार अलग रहा हो लेकिन फायदे में सबसे ज्यादा वही रहे है । ढाई दशक से वे सत्ता में काबिज हैं और अपनी शर्तों पर सियासी दांव खेलते रहे हैं ।

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