पटना में NEET छात्रा की मौत मामले की होगी CBI जांच, नीतीश सरकार ने भेजी सिफारिश

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January 31, 2026

पटनाः नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब जांच का जिम्मा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। बिहार सरकार ने इस कांड की सीबीआई जांच की अनुशंसा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर पटना में हुई NEET छात्रा की हत्या/संदिग्ध मौत (कांड संख्या-14/26) की जांच CBI से कराने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले का पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और किसी भी स्तर पर संदेह की गुंजाइश न रहे।

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गर्ल्स हॉस्टल में रहकर कर रही थी नीट की तैयारी
मामला पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां जहानाबाद जिले की छात्रा रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। छात्रा की मौत को लेकर शुरुआत से ही कई सवाल उठते रहे हैं। परिजनों का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि साजिश के तहत की गई हत्या है, जबकि पुलिस प्रशासन शुरुआती जांच में आत्महत्या की बात कहता रहा। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
डीजीपी से मुलाकात के बाद बढ़ा परिजनों का आक्रोश
शुक्रवार को छात्रा के माता-पिता और परिजन बिहार के डीजीपी से मिलने पटना पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि शीर्ष पुलिस अधिकारी से बातचीत के बाद उन्हें न्याय का भरोसा मिलेगा, लेकिन मुलाकात के बाद उनका गुस्सा और दर्द दोनों ही फूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि डीजीपी कार्यालय में उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा देने के बजाय समझौते और आत्महत्या की थ्योरी स्वीकार करने की सलाह दी गई।
‘आत्महत्या मान लीजिए’, डायरी दिखाकर दबाव का आरोप
छात्रा की मां ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान यह कहा गया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है और इसे साबित करने के लिए एक डायरी दिखाई गई, जिसे छात्रा द्वारा लिखा गया बताया गया। हालांकि परिजनों का कहना है कि उस डायरी में ऐसा कोई शब्द या संकेत नहीं है, जिससे आत्महत्या की पुष्टि हो सके। उनका आरोप है कि पुलिस जबरन इस केस को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश कर रही है।

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‘नहीं माने तो CBI को सौंप देंगे’, धमकी का दावा
परिजनों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि जब उन्होंने आत्महत्या की थ्योरी मानने से इनकार किया, तो उन पर दबाव बनाया गया। छात्रा की मां के अनुसार, उन्हें यह तक कहा गया कि अगर वे नहीं मानेंगे तो परिवार के सदस्यों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं और यह साबित किया जाएगा कि परिवार के ही किसी सदस्य ने गलत किया है। इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि अगर वे नहीं माने तो केस CBI को सौंप दिया जाएगा और उन्हें दो-तीन साल तक न्याय के लिए भटकना पड़ेगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल
परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों को लेकर भी उन्हें मौखिक रूप से गुमराह किया गया। उनका कहना है कि कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, जिनका जवाब पुलिस नहीं दे पा रही है। परिजनों का दावा है कि पुलिस किसी बड़े और प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रही है, इसी वजह से पूरे मामले की लीपापोती की जा रही है।
बिहार पुलिस पर भरोसा खत्म, न्यायिक जांच की मांग
छात्रा के माता-पिता ने साफ कहा है कि अब उन्हें बिहार पुलिस पर कोई भरोसा नहीं रहा। डीजीपी से बात नहीं बनने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें गृहमंत्री और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मिलने का दबाव बनाया, लेकिन गुस्से और निराशा में परिवार जहानाबाद लौट गया। परिजनों ने दो टूक कहा कि उन्हें किसी पद या व्यक्ति से नहीं, सिर्फ न्याय से मतलब है।

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‘न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार करेगा आत्महत्या’
परिजनों का दर्द उस समय छलक पड़ा जब उन्होंने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगा। उनका कहना है कि एक ओर उन्होंने अपनी बेटी खो दी है और दूसरी ओर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ा जा रहा है। यह बयान पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है और मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
डिप्टी सीएम से नहीं मिले परिजन, समीक्षा में जुटी सरकार
डीजीपी से मुलाकात के बाद परिजनों को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मिलने के लिए कहा गया था, लेकिन परिवार ने मिलने से इनकार कर दिया। वहीं, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार और पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के साथ बैठक की। सरकार स्तर पर पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है।
SIT की जांच से परिवार असंतुष्ट
बताया जा रहा है कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच लगभग पूरी कर चुका है और रिपोर्ट गृह मंत्री को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में पटना में किसी आपराधिक घटना से इनकार किया गया है। हालांकि, परिजन इस रिपोर्ट से पूरी तरह असंतुष्ट हैं और इसे एकतरफा बताते हुए खारिज कर रहे हैं।

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छात्राओं का न्याय मार्च, सड़क पर उतरा आक्रोश
मामले को लेकर पटना विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों की छात्राएं भी सड़क पर उतर आईं। शुक्रवार को मगध महिला कॉलेज से कारगिल चौक तक ‘बेटी बचाओ न्याय मार्च’ निकाला गया। छात्राओं ने CBI जांच की मांग करते हुए नारे लगाए और सरकार से बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
फोन डेटा, CCTV और स्नैपचैट से मिले सुराग
पुलिस के अनुसार, छात्रा के मोबाइल फोन का डेटा रिकवर कर लिया गया है और उसका विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के दौरान स्नैपचैट से भी कुछ साक्ष्य मिलने की बात कही जा रही है। SIT की नजर फिलहाल तीन संदिग्धों पर है और DNA रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
DNA जांच बनी केस की सबसे अहम कड़ी
अब तक जांच एजेंसियां 25 लोगों के DNA सैंपल ले चुकी हैं। इनमें हॉस्टल आने-जाने वाले युवक, हॉस्टल से जुड़े लोग, छात्रा को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले, परिजन और करीबी शामिल हैं। हॉस्टल संचालक के बेटे का भी DNA सैंपल लिया गया है। FSL जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने के बाद DNA मिलान को केस का सबसे अहम आधार माना जा रहा है।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका, न्यायिक निगरानी की मांग
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। याचिकाकर्ता सुषमा कुमारी ने अधिवक्ता अलका वर्मा के माध्यम से याचिका दाखिल कर जांच को हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। अब सबकी निगाहें CBI जांच और कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।

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