मुख्यमंत्री के जवाब की मांग को लेकर बीजेपी के विधायक सदन स्थगित होने के बाद विधानसभा में धरने पर बैठे, सत्ता पक्ष ने बताया लोकतंत्र का काला अध्याया

मुख्यमंत्री के जवाब की मांग को लेकर बीजेपी के विधायक सदन स्थगित होने के बाद विधानसभा में धरने पर बैठे, सत्ता पक्ष ने बताया लोकतंत्र का काला अध्याया

रांची: विधानसभा सत्र के चौथे दिन बीजेपी के विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। हंगामे की वजह से विधानसभा अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो ने सदन को स्थगित कर दिया। विधानसभा स्थगित होने के बाद बीजेपी के विधायक वेल में आकर बैठ गए और मुख्यमंत्री से जवाब की मांग करने लगे।
विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी विधायक अनंत ओझा के बयान पर कहा भी था कि वो विपक्ष के हर सवाल को नोट कर रहे है, वो इस सदन में विपक्ष के हर सवाल का जवाब देंगे। नौकरी के भी सवाल का जवाब देंगे और जो भी विपक्ष की मांग है उन सबका जवाब देंगे। लेकिन इसके बाद भी विपक्ष का विरोध शांत नहीं हुआ और सदन स्थगित होने के बाद भी वो वेल में धरने पर बैठ गए।
विपक्ष के इस रवैये का सत्ता पक्ष की ओर से खूब विरोध किया गया। मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि ये घटना लोकतंत्र का काला अध्याय है, विपक्ष जो परिपाटी शुरू कर रही है वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है, जनता इसका जवाब देगी। मुख्यमंत्री ने जब वो कह दिया कि वो जवाब देंगे तो विपक्ष को शांत हो जाना चाहिए था। मुख्यमंत्री सत्र के आखरी दिन जवाब देते है वो जवाब देंगे। शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि विपक्ष का आचरण ठीक नहीं है वो जनता के सवाल से भागना चाहते है। सत्ता पाने को लेकर ये इतने बेचैन है कि ऐसी हरकत कर रहे है। वही निर्दलीय विधायक सरयू राय ने भी कहा कि विपक्ष का ये व्यवहार सही नहीं है, ऐसा एक समय बिहार में हुआ था जब कर्पूरी जी की सरकार थी उस समय विपक्ष सदन स्थगित होने के बाद भी वेल में धरने पर बैठ गई थी।

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