एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा ने 3000 सुरक्षा बलों को दिया चकमा, सारंडा से भागकर 40 किमी दूर कोल्हान जंगल पहुंचा

Picture of Live Dainik

Live Dainik

June 26, 2026

एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार, दो सहयोगी के साथ गिरिडीह से पकड़ा गया

रांचीः झारखंड, बिहार और ओडिशा बेल्ट का मोस्ट वांटेड तथा एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा फिर 3000 सुरक्षा बलों की घेराबंदी को चकमा देने में कामयाब रहा है। वह सारंडा जंगल से निकल कर कोल्हान के जंगल में पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि उसके साथ उसका सहयोगी अजय महतो भी है। सुरक्षा बलों को अब उसका लोकेशन सारंडा के जराइकेला क्षेत्र से बाहर कोल्हान के जंगलों में मिल रहा है, जो 40 किलोमीटर दूर स्थित है। इससे पूर्व पिछले महीने केंद्रीय बलों और झारखंड जगुआर की टीम ने मिसिर बेसरा व उसके साथी नक्सलियों को चाईबासा के सारंडा जंगल के जराइकेला, गोइलकेरा और जंगल के बीच बलिबा क्षेत्र तक सीमित कर दिया था। बलिबा के आगे पहाड़ी क्षेत्र और घना जंगल है। यहां पुलिस का लगातार जाना मुश्किल था। इस कारण मिसिर बेसरा और उसके सहयोगी सारंडा-झारखंड-ओडिशा के त्रिकोणीय सीमा क्षेत्र में छोटे-छोटे समूहों में लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। नयी जानकारी मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया है। अब सारंडा से दलमा तक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। नक्सलियों का नया लोकेशन उंची पहाड़ियों से घिरा है और यहां जंगल भी घने हैं।
मिसिर बेसरा के पास पहले जैसी कैडर शक्ति नहींः इधर उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बेसरा भले ही सारंडा जंगल से निकल गया हो, लेकिन अब उसके पास न तो पहले जैसी कैडर शक्ति बची है और न ही क्षेत्र में वैसी पैठ है। ऐसे में उसे अपेक्षित सहयोग मिला मुश्किल हैं। अधिकारियों के अनुसार उसके सामने आत्मसमर्पण के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा है। पुलिस का कहना है कि सारंडा जंगल के जिस इलाके में वह अब तक छिपा हुआ था वहां कार्रवाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि क्षेत्र में जगह-जगह विस्फोटक बिछे हुए थे। जंगल के बाहर निकलने के बाद उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और उसे पकड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
सुरक्षाबलों ने बढ़ायी घेराबंदी, सख्त की जा रही घेराबंदीः सुरक्षा बल अब ओडिशा सीमा से सटे सारंडा क्षेत्र से लेकर दलमा तब अभियान चला रहे हैं। कई जिलों की पुलिस और केंद्रीस बल संयुक्त रूप से ऑपरेशन में लगे हैं। ड्रोन निगरानी और ग्राउंड इंटेलिजेंस की मदद से घेराबंदी और सख्त की जा रही है। पिछले एक माह से अभियान मुख्य रूप से जराइकेला क्षेत्र के आसपास केंद्रित था, लेकिन अब इसे फिर से विस्तार दिया गया है। झारखंड में नक्सलियों के पूर्ण सफाये के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सुरक्षा बल अप्रैल से विशेष अभियान चला रहे हैं। झारखंड में फिलहाल मिसिर बेसरा को सबसे बड़ा सक्रिय नक्सली कमांडर माना जा रहा है। उसके साथ लगभग 50 अन्य नक्सली बचे हैं। ये पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिहंभूम जिलों की ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में सक्रिय रहे हैं। पिछले सप्ताह तक सुरक्षा बलों ने उन्हें एक सीमित क्षेत्र में घेर लिया था और खाने-पीने सहित अन्य जरूरी सामग्री की आपूर्ति भी काफी हद तक बाधित कर दी थी। इसके बावजूद बेसरा किसी तरह घेराबंदी से निकलने में सफर रहा।
जानिये कैसे भाग मिसिर बेसरा
नक्सल ऑपरेशन द्वारा सुरक्षा बल पूरे दस्ते को ढूंढ रहे थे। जंगल में कैंप भी लगाया था। जमीन में लैंड माइंस होने का डर था, लेकिन रात के वक्त जवान बाहर निकलने से परहेज करते थे, जिसका लाभ नक्सलियों ने उठाया। वह टुकड़ों में बंट गये। सबसे पहले मिसिर बेसरा केवल एक साथ के साथ वहां से निकल गया, इसके बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में उसके अन्य साथी जंगल के रास्ते नये लोकेशन पर पहुंच गये।
तीन हिस्सों में बंटा नक्सली नेटवर्क
नक्सली नेटवर्क अब तीन हिस्सों में बंट चुका है। पहला हिस्सा मिसिर बेसरा के कोर ग्रुप का है, जिसमें दो हार्डकोर नक्सली शामिल है। अजय महतो भी इसी ग्रुप समूह में है। इस ग्रुप का लोकेशन अब सारंडा की बजाय कोल्हान के जंगलों में मिल रहा है। दवाब बढ़ने पर बेसरा पहले भी कोल्हान, विशेषकर दलमा क्षेत्र को शरणस्थली के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। दूसरे हिस्से में 10 से 15 नक्सली शामिल है। जो सारंडा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में छोटे-छोटे समूहों में बंटकर रह रहे हैं। वहीं तीसरे समूह में करीब नौ नक्सली है। जिनकी मौजूदगी पोड़ाहाट के जंगलों में बतायी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लॉजिस्टिक सप्लाई टूटने, बड़े कैंप ध्वस्त होने और सुरक्षा बलों की सख्त घेराबंदी के कारण नक्सलियों को लगातार ठिकाने बदलने पड़ रहे है।
एसपी अमित रेणु का ऑपरेशन को लेकर बयानः नक्सली अब गिनती के बचे हैं। ऑपरेशन का क्षेत्र बढ़ा दिया गया है। सारंडा से बाहर गोइलकेरा तग तो हम पहले भी ऑपरेशन कर रहे थे। अब कोल्हान जंगल के सानुआ में भी घेराबंदी कर चुके है। वहां ऑपरेशन भी हुए है। बारिश में उनकी मुश्किलें और बढ़ेगी। चरमपंथियों के पास सरेंडर के अलावा कोई उपाय नहीं है।

See also  CGL Paper Leak Case में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC पर लगाया दो लाख का जुर्माना, आरोपी कंपनी को बड़ी राहत

मिसिर बेसरा नहीं करेगा सरेंडर, बेटे की अपील भी ठुकराई

एक करोड़ का इनामी और भाकपा (माओवादी) का शीर्ष नेता मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर झारखंड पुलिस के सामने सरेंडर नहीं करेगा। पुलिस के मुताबिक, परिवार और बेटे के जरिए की गई भावनात्मक अपील को भी उसने ठुकरा दिया है। झारखंड पुलिस ने मिसिर बेसरा के बेटे के माध्यम से उससे संपर्क साधा था। बेटे ने बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उसे मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी। लेकिन मिसिर ने साफ कहा कि अब हथियार नहीं डालेगा।
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर बेसरा 1980 और 1990 के दशक में एमसीसी से जुड़ा और बाद में संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। 2007 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन 2009 में चाईबासा कोर्ट ले जाने के दौरान नक्सलियों ने विस्फोट कर उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। तब से वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

See also  दिल्ली दौरे पर गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंगलवार शाम तक लौटेंगे रांची
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now