पटनाः सरस्वती पूजा के मौके पर राजनीति का एक अलग ही रंग देखने को मिला। जनता दल द्वारा आयोजित सरस्वती पूजा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने बेटे के साथ पहुंचे तो एक अलग ही चर्चा और कयास शुरू हो गया। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में एंट्री के कयासों के बीच केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने एक ऐसी बात कह दी कि जिसके बाद निशांत को लेकर कयास और तेज हो गया।
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ललन सिंह का इशारा और निशांत की खामोशी चर्चा का विषय बन गया। नीतीश कुमार सरस्वती पूजा के आयोजन में बेटे निशांत के साथ पहुंचे। जैसे ही मुख्यमंत्री पूजा पंडाल पहुंचे उन्होंने बेटे से पूछा, कब आए हो जी यहां। इसके जवाब में निशांत ने कहा- हो गया आधा घंटा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के दौरान जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।इस कार्यक्रम में राजनीतिक के साथ-साथ पारिवारिक क्षण भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को फिर से हवा दे दी कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत सक्रिय राजनीति में कब एंट्री लेंगे।
'अब मान जाइए और राजनीति में आइए'@NitishKumar के सामने निशांत को मंत्री @LalanSingh_1 ने दे दिया ऑफर @Jduonline @RJDforIndia @BJP4Bihar #Bihar #NitishKumar pic.twitter.com/iRbW5FljtU
— Live Dainik (@Live_Dainik) January 24, 2026
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दरअसल जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार के पीठ पर हाथ फेरते हुए उनसे राजनीति में आने का इशारा किया। उन्होंने कहा कि अब मान जाइए और राजनीति में आ जाइए। हालांकि, इस पर निशांत कुमार ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। वह मुस्कुराते हुए शांत रहे और किसी भी तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए।
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केंद्रीय मंत्री ने निशांत को दिया राजनीति में आने का ऑफर
बाद में जब निशांत कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वह सरस्वती माता का आशीर्वाद लेने आए हैं। उन्होंने कहा, 'पिता जी भी आशीर्वाद लेने आए हैं और मैं भी मां सरस्वती का आशीर्वाद लेने आया हूं।' उनके इस संक्षिप्त बयान ने साफ कर दिया कि फिलहाल वो खुद को राजनीतिक चर्चाओं से दूर रखना चाहते हैं।
निशांत कुमार की मौजूदगी और ललन सिंह की टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में मौजूद कई कार्यकर्ता उनके आसपास नजर आए। राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगे या नहीं। सरस्वती पूजा का यह कार्यक्रम भले ही धार्मिक आयोजन था, लेकिन इसमें राजनीतिक संदेश,संकेत और चर्चाएं भी साथ-साथ चलती रहीं।




