रांचीः शुक्रवार का दिन झारखंड कैडर के निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे के लिए राहत की खबर लेकर आया। पिछले एक साल से ज्यादा समय से रांची के बिरसा मुंडा जेल में बंद विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने हजारीबाग में उपायुक्त (DC) के कार्यकाल के दौरान सेवायत और वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री व गड़बड़ी से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।इससे पहले, कई मामलों में इनके खिलाफ जाँच एजेंसियों ने चार्जशीट तक फाइल नहीं किया, इसलिए इन्हें डिफॉल्ट बेल मिल गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ (जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां) ने सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश
कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए निर्देश दिया है कि विनय चौबे देश छोड़कर नहीं जा पाएंगे और वे मामले से जुड़े गवाहों को किसी भी तरह से प्रभावित या संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने को कहा गया है।सुनवाई के दौरान चौबे के अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि इस मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और यह मामला वर्ष 2009-10 के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है।
28 अप्रैल को खारिज हुई थी जमानत याचिका इससे पहले 28 अप्रैल को झारखंड हाईकोर्ट ने विनय चौबे को जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिस मामले में विनय चौबे ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, वह हजारीबाग जिले में हुआ लैंड स्कैम का मामला है। ACB ने इस संबध में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है। इस केस में विनय चौबे के करीबी विनय सिंह उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह समेत 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद अब विनय चौबे जेल की सलाखों के बाहर आ सकते हैं।







