पटना: बिहार में नीट यूजी और री-नीट यूजी परीक्षा में धांधली और अनियमितता के मामलों की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई ने बड़ी कार्रवाई की है। ईओयू ने अलग-अलग मामलों में मुख्य आरोपियों के रूप में सामने आए मेडिकल छात्र डॉ. उज्जवल राज और डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को गिरफ्तार किया है। डॉ. रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
NEET पेपर लीक, मास्टरमाइंड समेत 3 गिरफ्तार : बिहार में 3 मई 2026 को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में धांधली के आरोप में गिरियक, पावापुरी थाना कांड संख्या 217/26 दर्ज किया गया था। वहीं 21 जून 2026 को आयोजित री-नीट यूजी परीक्षा में अनियमितता को लेकर लखीसराय में कवैया थाना में दो और किउल थाना में एक मामला दर्ज हुआ था। इन मामलों में शुरुआती अनुसंधान नालंदा और लखीसराय पुलिस ने किया। मामलों की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी गई।


EOU ने पटना में परीक्षा सेंटर के बाहर से पकड़ा : ईओयू के अनुसार, ”11 अगस्त को नीट धांधली मामले के मुख्य आरोपी डॉ. उज्जवल राज को पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र में आर्यभट ज्ञान विश्वविद्यालय की परीक्षा केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया गया। वह महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पावापुरी में MBBS फाइनल ईयर का छात्र है और पूरक परीक्षा में शामिल होने पहुंचा था।”
ईओयू की माने तो, ”जांच के दौरान उसके पास से एक स्कॉर्पियो वाहन और 2 लाख 95 हजार रुपये बरामद किए गए थे। पुलिस के अनुसार यह राशि फर्जी स्कॉलर बैठाने से संबंधित था। डॉ. उज्जवल राज पर वर्ष 2024 में NEET परीक्षा में फर्जी स्कॉलर बैठाने से जुड़े मामले में भी आरोप लगे थे।”
री-नीट मामले का मुख्य सरगना गिरफ्तार : 12 अगस्त को ईओयू ने री-नीट यूजी परीक्षा से जुड़े तीन मामलों के मुख्य आरोपी डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के मुताबिक वो इस गिरोह का मुख्य सरगना था। वह भी महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पावापुरी में MBBS फाइनल ईयर का छात्र है।
ईओयू ने बताया कि, डॉ. रविशंकर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से पास कराने के लिए स्कॉलर बैठाने और दस्तावेजों में हेरफेर करने का आरोप हैं।उसकी पत्नी मधु प्रिया पर भी री-नीट परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने का मामला बताया गया है।
छापेमारी में मिले कई अहम दस्तावेज : ईओयू अधिकारियों के मुताबिक, डॉ. रविशंकर की निशानदेही पर पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र स्थित दो ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान कई परीक्षाओं से संबंधित एडमिट कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, खाली परीक्षा बुकलेट, बड़ी संख्या में ब्लैंक चेक, बैंक पासबुक, डिजिटल उपकरण, करीब दो लाख रुपये नकद और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।
ईयोयू के अधिकारियों ने बताया कि, फर्जी जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया कि गिरोह द्वारा मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के लिए इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा रहा था। साथ ही एक टाटा हैरियर वाहन भी जब्त किया गया है।
12 से 30 लाख रुपये तक वसूली का आरोप : जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरोह में फर्जी स्कॉलर बैठाने के लिए बायोमेट्रिक और फोटो से जुड़ी प्रक्रिया में हेरफेर किया जाता था। आरोप है कि प्रत्येक अभ्यर्थी से स्कॉलर बैठाने के नाम पर 12 से 30 लाख रुपये तक की रकम ली जाती थी। जांच में लखीसराय, हाजीपुर, नवादा और नालंदा समेत कई जिलों के बायोमेट्रिक वेंडरों और अन्य लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं।
बायोमेट्रिक और फोटो में हेरफेर का आरोप : ईओयू के अनुसार, उसके खिलाफ गिरोह को संरक्षण देने के साक्ष्य मिले हैं। मामले में आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 18/26 दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है। इनमें विभिन्न मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के छात्र, बायोमेट्रिक वेंडर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोग शामिल हैं। सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।






