पलामू : झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने पलामू की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में पलामू जिले में 100 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं, जो कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाती हैं। उन्होंने हाल ही में पंडवा के विनोद पांडेय और पाटन के प्रभात मेहता की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से लोगों में भय का माहौल है। पलामू परिसदन में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में केएन त्रिपाठी ने प्रभात मेहता हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मृतक के भाई ने पुलिस कर्मियों पर प्रभात मेहता को उठाकर ले जाने और मारपीट के बाद हत्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि मृतक के स्वजन ने समय रहते पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी थी, लेकिन उन्हें भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि प्रभात को कौन से पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए थे। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े पुलिसकर्मी का संबंध झारखंड के पुलिस महानिदेशक से होने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। पत्रकार वार्ता में परमदेव सिंह कुशवाहा, शत्रुधन कुमार शत्रु, रंजन दूबे, विवेकानंद त्रिपाठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
गृह विभाग पर मुख्यमंत्री पर्याप्त ध्यान दें
केएन त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि गृह विभाग उनके पास है, लेकिन उसके संचालन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री विभाग को प्रभावी ढंग से नहीं संभाल पा रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसी सक्षम मंत्री को सौंपनी चाहिए, ताकि कानून-व्यवस्था में सुधार हो सके।
इथेनॉल मिश्रण नीति पर भी उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री ने पेट्रोल-डीजल में इथेनॉल मिश्रण की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा से इस विषय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए पूछा कि इथेनॉल किन इकाइयों से खरीदा जा रहा है, इसका वैज्ञानिक आधार क्या है और इससे वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किस आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ता है और किसी अतिरिक्त किट की जरूरत होती है, तो सरकार उसे वाहन मालिकों को निःशुल्क उपलब्ध कराए। अन्यथा इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।


