रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा कथित अनियमितता मामले में रांची के अपर न्यायिक आयुक्त-1 की अदालत ने 8 सितंबर को अपने 5 सितंबर के आदेश में एक अहम संशोधन किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में हुई टाइपिंग की गलती के कारण यह अर्थ निकल रहा था कि आरोपी अभय कुमार तिवारी के पिता भी संबंधित परीक्षाओं में शामिल हुए थे। अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद इस गलती को सुधार दिया।
क्या था मामला?
अदालत के 8 सितंबर के संशोधित आदेश के मुताबिक, मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, पिता- सुखदेव तिवारी, TDPL से जुड़े हुए थे और उन्होंने खुद वर्ष 2024 की FRO (PT) Examination तथा ACF (PT) Examination में हिस्सा लिया था। FRO परीक्षा में उनका रोल नंबर 24400147, जबकि ACF परीक्षा में रोल नंबर 24300086 बताया गया है। दोनों परीक्षाएं JPSC के माध्यम से TDPL द्वारा आयोजित की गई थीं।

अदालत ने इस स्थिति को “grave conflict of interest” बताते हुए कहा कि यह सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता और परीक्षा की शुचिता के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।
टाइपिंग की गलती से क्या भ्रम हुआ?
अभियोजन की ओर से अदालत को बताया गया कि 5 सितंबर के मूल आदेश के पैरा 9(i) में अनजाने में ऐसी भाषा टाइप हो गई थी, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अभय तिवारी के पिता भी परीक्षा में शामिल हुए थे। अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद इसे महज टाइपिंग की गलती माना और पैरा 9(i) को संशोधित कर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 5 सितंबर 2026 के मूल आदेश के बाकी सभी पैराग्राफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नया आदेश मूल आदेश के साथ पढ़ा जाएगा और उसका अभिन्न हिस्सा माना जाएगा।

जांच के बड़े संदर्भ में अभय तिवारी
यह मामला उस व्यापक CID जांच से जुड़ा है जिसमें TDPL और झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। जुलाई 2026 में CID ने गोड्डा के पोड़ैयाहाट में पदस्थापित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में उनकी TDPL में पूर्व भूमिका और विभिन्न JPSC-JSSC परीक्षाओं में उनकी सफलता को भी जांच के दायरे में रखा गया है। \
अभय तिवारी के मामले में JSSC CGL, PGT, ACF, FRO और FSO समेत कई परीक्षाओं को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन सभी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी साबित हो चुकी है, ऐसा कहना अभी उचित नहीं होगा; उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जांच एजेंसियां इन पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
TDPL पर भी उठे गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में TSR Data Processing Private Limited (TDPL) की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को JPSC परीक्षाओं के संचालन का काम दिया गया था, जबकि उसके खिलाफ पहले से ब्लैकलिस्टिंग का रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी और उसे कथित तौर पर खुली टेंडर प्रक्रिया के बजाय नामांकन के जरिए काम मिला।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत के 8 सितंबर के संशोधित आदेश ने पिता सुखदेव तिवारी के परीक्षा देने संबंधी पैदा हुए भ्रम को साफ कर दिया है। अदालत के संशोधित रिकॉर्ड में परीक्षार्थी के रूप में स्वयं मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी का नाम है।
वाह रे CID! मरे हुए व्यक्ति से परीक्षा लिखवा दिया, कैसे यकीन करें इस जांच पर... CID ने जांच में पाया कि अभय तिवारी के पिता दो परीक्षा में पास हुए, लेकिन यहां पता चल यह है कि उनकी मौत 2018 में ही हो चुकी है।
पहली जांच में जो महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले, उसे अनुराग गुप्ता ले गए। अब…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) September 8, 2026





