रांची। रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में चल रहे जन औषधि केंद्र को एक प्राईवेट एजेंसी को सौंप दिया गया है। यह जन औषधि केंद्र रिम्स को 20 प्रतिशत आमदनी भी देता था।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय जन औषधि परियोजना द्वारा प्रायोजित कम मूल्य पर गुणवत्तायुक्त दवाईयों को गरीब मरीजों को उपलब्ध करायी जाती है। रांची के उपायुक्त की अगुवाई में त्रिपक्षीय समझौता भारत सरकार के उपक्रम बीपीपी, सिविल सर्जन कार्यालय रांची और रिम्स के बीच हुई, जिसके बाद निविदा के माध्यम से विव्धवा मेडीकोज नामक एजेंसी का चयन किया गया है और यह 24 जनवरी से रिम्स में संचालित है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रिम्स के विभिन्न स्थानों पर कार्यरत 11 फार्मासिस्ट को अपने कार्य के अतिरिक्त जन औषधि केंद्र में कार्य करने के लिए प्रतिनियुक्ति की गयी थी। एजेंसी तय होने के बाद उन्हें पुनः अपने मूल स्थान पर कार्य करने के लिए आदेश निर्गत कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निविदा के माध्यम से चयनित एजेंसी विव्धया मेडीकोज द्वारा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र सुचारू रूप से चलाया जा रहा है, जो कि गुणवत्तायुक्त दवाईयां कम मूल्य पर मरीजों को उपलब्ध करा रहा है। साथ ही साथ एमआरपी दर पर अतिरिक्त 7 प्रतिशत छूट भी दी जा रही है।