जमशेदपुरः जिले के चर्चित डॉक्टर और 111 सेव लाइफ अस्पताल के संचालक डॉक्टर ओपी आनंद को उनके बड़े भाई सत्य प्रकाश सुधांशु ने गोली मार दी। घटना सोमवार रात आदित्यपुर के गायत्री शिक्षा निकेतन स्थित आवास पर हुई। डॉक्टर आनंद को पीठ में गोली लगी है। उन्हें टीएमएच में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।
पुलिस ने सत्यप्रकाश को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने पिस्टल जब्त कर लिया है। आरआईटी थाने में उनसे पूछताछ की जा रही है। आरआईटी थाना प्रभारी रविकांत पाराशर ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और प्रयुक्त हथियार की जांच की जा रही है।

जिम से लौटते ही हुआ विवाद
डॉ. आनंद रात करीब आठ बजे जिम से अपने आवास पहुंचे थे। उन्होंने निजी सुरक्षाकर्मी को घर जाने के लिए कहा ही था कि स्कूल और आवास परिसर में बड़े भाई सत्यप्रकाश सुधांशु के साथ उनकी कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों और चालक अमित के अनुसार, सुधांशु ने डॉ. आनंद की पत्नी सरिता आनंद पर पिस्टल तान दी। पत्नी को बचाने के लिए डॉ. आनंद आगे आए, तभी सुधांशु ने फायरिंग कर दी। एक गोली सीधे डॉ. आनंद की पीठ में लगी, जबकि दूसरी गोली शरीर को छूते हुए निकल गई। चालक व स्वजनों ने आनन-फानन में दरवाजा बंद कर उनकी जान बचाई। घटना के समय बेटी आम्या भी मौजूद थी।
आठ दिन पहले भी हुई थी मारपीट
दोनों भाइयों के बीच पिता की मृत्यु के बाद से स्कूल और पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। परिसर के भूतल पर डॉ. आनंद और ऊपरी तल पर सुधांशु का परिवार रहता है। इसको लेकर डॉ. ओपी आनंद की पत्नी के द्वारा बराबर सत्यप्रकाश सुधांशु के परिवार के साथ गाली गलौज किया जाता था।बीते आठ दिन पूर्व भी स्कूल परिसर में दोनों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें सुधांशु ने छोटे भाई की पिटाई की थी। कोविड काल के बाद से अस्पताल घाटे में चलने के कारण डॉ. आनंद तनाव में भी चल रहे थे।
बन्ना गुप्ता प्रकरण से रहे थे चर्चा में
डॉ. ओपी आनंद जमशेदपुर और आदित्यपुर के जाने-माने चिकित्सक हैं तथा जमशेदपुर पश्चिम से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। मई 2021 में कोरोना काल के दौरान वे उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे, जब अस्पताल निरीक्षण के विवाद में उन्होंने राज्य के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के खिलाफ तीखी व अमर्यादित टिप्पणी की थी। इसके बाद महामारी अधिनियम और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर सरायकेला जेल भेजा गया था, जहां से बाद में उन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिली थी।








