तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद शशि थरुर की नजदिकियां पीएम मोदी से बढ़ती ही जा रही हैं। सवाल ये उठ रहा है कि जिस तरह गुलाम नबी आजाद ने कभी कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहा था क्या शशि थरुर भी उसी कतार में शामिल हो सकत हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि पीएम मोदी ने केरल के विजिंजम पोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम में सिर्फ थरुर से ही हाथ मिलाया ।
केरल के विजिंजम बंदरगाह का उद्घाटन
गौरतबल है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल में विजिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के पहले चरण का औपचारिक उद्घाटन किया और इसे भारत के समुद्री भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। हांलाकि कार्यक्रम सरकारी था लेकिन रंग राजनीति का चढ़ गया । इस परियोजना का श्रेय लेने को लेकर सत्तारूढ़ एलडीएफ, विपक्षी यूडीएफ और केंद्र की एनडीए सरकार के बीच बयानबाज़ी शुरू हो गई।
#WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala: At the inauguration event of Vizhinjam port, PM Modi says, " I want to tell CM, you are a strong pillar of INDI alliance, Shashi Tharoor is also sitting here. Today's event is going to disturb the sleep of many" pic.twitter.com/UQvFrslWBP
— ANI (@ANI) May 2, 2025
मोदी ने लिए 'INDIA' के मजे
पीएम मोदी ने भी आग में घी डालते हुए विपक्षी इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं — आप इंडिया गठबंधन के एक मजबूत स्तंभ हैं, और शशि थरूर भी यहां मौजूद हैं। आज का कार्यक्रम कई लोगों की नींद उड़ा देगा।”
थरुर के शामिल होने से कांग्रेस में बवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर, जो तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं, इस समारोह में शामिल हुए जबकि उनकी पार्टी कांग्रेस के अन्य नेता, जिनमें विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन भी शामिल हैं, इससे दूर रहे। इससे कांग्रेस के भीतर मतभेद भी उजागर हुए।
केरल कांग्रेस ने उठाए सवाल
सतीसन ने शुक्रवार सुबह फेसबुक पोस्ट में यूडीएफ की इस परियोजना में भूमिका को याद करते हुए कहा कि इसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने दिवंगत मुख्यमंत्री ओमान चांडी का जिक्र किया, जिन्होंने अदानी समूह के साथ इस परियोजना का करार किया था, और एलडीएफ पर निशाना साधा, जिसने कभी इसे “₹6,000 करोड़ का रियल एस्टेट घोटाला” कहा था।
“जो लोग इस परियोजना का विरोध करते थे, वे आज इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इसकी शुरुआत यूडीएफ ने की थी, और इतिहास यही कहेगा,” सतीसन ने लिखा।
पिनराई विजयन ने लिया श्रेय
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने समारोह में विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह बंदरगाह एलडीएफ सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है, जिसकी परिकल्पना 1996 में की गई थी।
“यह केवल बंदरगाह का उद्घाटन नहीं है, बल्कि भारत के विकास का एक भव्य द्वार खुला है,” उन्होंने कहा। “यह पहली बार है कि भारत में किसी राज्य की पहल पर एक प्रमुख बंदरगाह विकसित किया गया है। इस परियोजना की लागत का बड़ा हिस्सा केरल ने उठाया है — यह बात माननी होगी।”
वक्त से पहले शुरु हुआ बंदरगाह
विजयन ने यह भी बताया कि जहां परियोजना को 2045 तक पूरा करने की योजना थी, वहीं मौजूदा सरकार ने इसे तेज़ कर 2024 में ही वाणिज्यिक संचालन शुरू कर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने पोर्ट के रणनीतिक महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन समुद्री देशों में शामिल है। विजिंजम बंदरगाह सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आर्थिक स्थिरता को बल देगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस बंदरगाह की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक गहराई और कम ड्रेजिंग की ज़रूरत इसे भारत को वैश्विक शिपिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम कड़ी बनाती है।




