नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के आज के संस्करण में झारखंड के गुमला जिले की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे एक समय माओवादी हिंसा से जूझ रहा गुमला का बासिया ब्लॉक अब मत्स्य पालन के जरिए शांति और समृद्धि की मिसाल बन गया है।
पीएम मोदी ने कहा, “कभी-कभी सबसे बड़ा उजाला वहीं से फूटता है, जहाँ अंधेरे ने सबसे ज्यादा डेरा जमाया हो।” उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि गुमला जैसे क्षेत्र, जो कभी भय और हिंसा के गहरे साए में थे, अब विकास और उम्मीद की किरण बनते जा रहे हैं।
हथियार छोड़ थामा जाल
प्रधानमंत्री ने ओमप्रकाश साहू नामक युवक का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ मछली पालन की शुरुआत की। यह बदलाव कोई आसान फैसला नहीं था – उन्हें समाज के कुछ वर्गों का विरोध भी झेलना पड़ा और धमकियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
ओमप्रकाश साहू ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया, तालाब खुदवाए और धीरे-धीरे आसपास के गांवों में भी बदलाव की बयार बहने लगी। आज बासिया ब्लॉक के 150 से अधिक परिवार मत्स्य पालन से जुड़ चुके हैं।
पूर्व नक्सली बने रोजगार प्रदाता
पीएम मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इन परिवारों में कई ऐसे लोग भी हैं जो कभी नक्सली संगठनों से जुड़े थे। आज वे सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं और अपने साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, “गुमला की यह यात्रा हमें सिखाती है – अगर रास्ता सही हो और मन में भरोसा हो तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी विकास का दीप जल सकता है।”
विकास की नई परिभाषा
मन की बात के इस प्रसंग ने साफ कर दिया कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं बल्कि ज़मीनी हकीकत में बदलाव ला रही हैं। गुमला का यह उदाहरण बताता है कि सरकारी योजनाओं और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से कैसे एक हिंसाग्रस्त क्षेत्र भी शांति, रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह पर चल सकता है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे ओमप्रकाश साहू जैसे लोगों से प्रेरणा लें और बदलाव के वाहक ब





