चाईबासा में 5 बच्चों को संक्रमित HIV ब्लड चढ़ाने का मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज

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February 7, 2026

चाईबासा में 5 बच्चों को संक्रमित HIV ब्लड चढ़ाने का मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज

चाईबासाः सदर अस्पताल में थैलिसीमिया पीड़ित पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना में न्याय प्रक्रिया तेज हो गयी है। झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर चाईबासा सदर थाना में लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के तत्कालीन लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार सहित अन्य कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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जानकारी के मुताबिक, यह घटना पिछले साल अक्टूबर की है। चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 से 7 वर्ष आयु के पांच बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था। बाद में जांच रिपोर्ट में सभी बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जिससे जिले में हड़कंप मच गया था।परिजनों ने ब्लड बैंक में रक्त की स्क्रीनिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था।मामले में झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम कुमार की अदालत ने सुनवाई के दौरान इसे अत्यंत गंभीर माना। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं और थाना प्रभारी तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।  कोर्ट के आदेश के बाद पीड़ित बच्चों में से एक की मां के आवेदन पर सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।

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सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार ने बताया कि आवेदन में कहा गया है कि ब्लड बैंक में रक्त जांच और स्क्रीनिंग के मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण संक्रमित रक्त बच्चों को चढ़ा और वे एचआईवी पॉजिटिव हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।घटना उजागर होने और कोर्ट के निर्देश के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में करीब चार महीने की देरी हुई, इस पर भी अदालत ने नाराजगी जताई थी।मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। साथ ही तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार मांझी को निलंबित किया गया था और लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को सेवामुक्त कर दिया गया था।घटना के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और कड़ी कानूनी कार्रवाई और सहयोग का भरोसा दिया था। झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में परिजनों ने रांची में विधानसभा के सामने धरना भी दिया। बाद में मोर्चा की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर अब FIR दर्ज हुई है।

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