शिबू सोरेन की सेहत खराब है । करीब 20 दिनों से वे अस्पताल में भर्ती हैं । अपने जल जंगल-जमीन से दूर देश की राजधानी के अस्पताल में वो अपने बेटे हेमंत और बहू हेमंत की निगहबानी में इलाज करा रहे हैं । दिशोम गुरु बीमार तो कई वर्षों से हैं । पहले की तरह वे राजनीति में ना तो एक्टिव है और ना ही कार्यकर्ताओं से उस तरह मिल पाते हैं, फिर भी वे अक्सर रांची में अपने आवास पर अपनी पार्टी और झारखंड के नेताओं को आशीर्वाद देते हुए नजर आ जाते थे लेकिन इस बार उनकी बीमारी लंबी खींच रही है ।
दिशोम गुरु मौजूदा दौर की राजनीति के एकमात्र ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें सही मायनों में आंदोलनकारी और आदिवासियों का सर्वोच्च नेता माना जाता है । शिबू सोरेन ने अपना सफर शून्य से शुरु करते हुए अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को शिखर तक पहुंचाया । दिशोम गुरु की शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके हाल-चाल जानने के लिए सर गंगाराम अस्पताल में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची । हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उनके पिता के जल्द सेहतमंद होने की दुआ की ।

झारखंंड की सियासत में भले ही तमाम नेताओं की राजनीति एक दूसरे की विरोधी रही हो लेकिन जब बात दिशोम गुरु की हुई तो तमाम नेता दिल्ली पहुंचे । चाहे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास हो या फिर सुदेश महतो। रघुवर दास और सुदेश महतो से हेमंत सोरेन की यह मुलाकात ये शिबू सोरेन का कद बताने के लिए काफी हैं । केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रांची में कहा कि वे दिशोम गुरु से मिलेंगे तो वे भी सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे । अरविंद केजरीवाल ने भी मुलाकात की है ।
शिबू सोरेन की शख्सियत और उनके संघर्ष की ताकत का सम्मान ही तो है कि देश के तमाम बड़े नेता उनकी सेहत के लिए फिक्रमंद है । नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी हेमंत सोरेन से मिलकर दिशोम गुरु के जल्द ठीक होने की कामनाएं कीं । राहुल गांधी ने कल्पना सोरेन और हेमंत सोरेन से काफी देर तक बातचीत की और तबीयत के बारे में पड़ताल की ।
सूदखोरी के खिलाफ, शोषण के खिलाफ और अलग झारखंड राज्य के लिए अपना जीवन खपा देने वाले शिबू सोरेन भले ही अस्पताल में हों लेकिन उनकी विरासत झारखंडियों को अलग राज्य के तौर पर मिल चुकी है।इसीलिए तो हर झारखंडी दिशोम गुरु को जल्द से जल्द फिर से सेहतमंद देखने के लिए दुआ कर रहा है।
खुद हेमंत सोरेन पिछले कई दिनों से दिल्ली में अपने पिता के पास है । उनका इलाज करा रहे हैं । आमतौर पर किसी राज्य का मुख्यमंत्री इतने दिनों तक राज्य से बाहर नहीं रहता है लेकिन शिबू सोरेन की शख्सियत और हेमंत सोरेन का पुत्र कर्तव्य सियासत और सत्ता से उपर है तभी तो बेहद जरुरी हो रहा तभी रांची में रहते हैं नहीं तो इस मुश्किल घड़ी में वो पिता को अकेला नहीं छोड़ रहे हैं ।





