हिंडाल्को मुरी की पहल :‘तोरांग वाटिका’ का उद्घाटन,रेड मड अपशिष्ट भूमि से विकसित हुआ हरित बायो-पार्क

हिंडाल्को मुरी की पहल :‘तोरांग वाटिका’ का उद्घाटन,रेड मड अपशिष्ट भूमि से विकसित हुआ हरित बायो-पार्क

रांची : पर्यावरणीय संतुलन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मुरी ने रेड मड पोंड संख्या–3 की अपशिष्ट भूमि पर विकसित ‘तोरांग वाटिका’—एक अद्वितीय बायो-पार्क—का उद्घाटन किया। झारखंडी भाषा में ‘तोरांग’ का अर्थ ‘जंगल’ है, जो प्रकृति के पुनर्जीवन का प्रतीक है। यह परियोजना कंपनी की अभिनव “रेड टू ग्रीन” पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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वर्ष 2024 में प्रारंभ इस पहल के अंतर्गत लगभग 45 एकड़ रेड मड अपशिष्ट भूमि को एक समृद्ध हरित क्षेत्र में परिवर्तित किया गया है। जो क्षेत्र पहले वनस्पति के लिए ठीक नहीं माना जाता था, वह आज वैज्ञानिक योजना और समर्पित प्रयासों के माध्यम से एक सजीव, आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल बायो-पार्क के रूप में विकसित हो चुका है। यह परिवर्तन हिंडाल्को की पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निर्मित इस पार्क में पक्षियों, सरीसृपों एवं अन्य जीवों का आगमन शुरू हो गया है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिल रही है। प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों—विशेषकर बाँस—से निर्मित संरचनाएँ इस पार्क को जैव विविधता और सतत डिजाइन का प्रतीक बनाती हैं, साथ ही झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करती हैं।
ये सभी संरचनाएँ प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित हैं, जो पार्क की सुंदरता को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश भी देती हैं।

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इस परियोजना का उद्घाटन श्री संजीव कुमार, आईएफएस, पीसीसीएफ एवं एचओएफएफ, झारखंड सरकार द्वारा डॉ. ए. टी. मिश्रा, पीसीसीएफ सह कार्यकारी निदेशक (डब्ल्यूएलडीबी), झारखंड सरकार की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। हिंडाल्को की ओर से सीएमओ एन.एन.राय, कॉरपोरेट अफेयर हेड संजय श्रीवास्त्व, प्रशांता बोस व अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थि थे।
इस मौके पर श्री संजीव कुमार ने हिंडाल्को के इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘तोरांग वाटिका’ औद्योगिक अपशिष्ट भूमि के सफल पुनर्स्थापन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो उद्योग, पर्यावरण और समाज के बीच सामंजस्य का प्रतीक है। यह पहल भविष्य में इसी प्रकार की हरित परियोजनाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

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