हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी में राजभवन की भूमिका और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश को लेकर राज्यपाल ने दिया जवाब

रांची: झारखंड में राजभवन और मुख्य सत्तारूढ़ पार्टी जेएमएम एक बार फिर टकराव की स्थिति में है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश को लेकर उठाये गए सवालों पर राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने गुरूवार को अपना जवाब दिया।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान कहा था कि उनकी गिरफ्तारी में कही न कही राजभवन की भूमिका रही है। हेमंत के इस आरोप पर राज्यपाल ने जवाब देते हुए कहा है कि राजभवन एक संवैधानिक प्राधिकरण है, हम यहां संविधान की सेवा करने के लिए है। वे जो आरोप लगा रहे है उनके सबूत कहां है। इसको लेकर राजनीति हो रही है मै क्या करूं। मैने अखबार में देखा कि राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की है,लेकिन मैने ऐसा कभी नहीं किया।
उन्होने आगे कहा कि हेमंत ईडी की कस्टडी में थे, उन्होने खुद राजभवन आकर मुझे पत्र दिया था, जिसमें लिखा गया था कि वो ईडी की कस्टडी में है, इसलिए इस्तीफा देना चाहते है। तब मैने कहा ठीक है मै आपका इस्तीफा स्वीकार करता हूं। मैने तीन घंटे तक उनका इंतजार किया, वो आये उन्होने इस्तीफा दे दिया, हमने स्वीकार कर लिया।
राज्यपाल के हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और इस्तीफे को लेकर दिये गए बयान पर जेएमएम विधायक और पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि महामहिम कह रहे है तो जरूर उनके कागजात भी होंगे उनके पास। हेमंत सोरेन ने जो राजभवन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे, ये उनके अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है, महामहिम को लिखित रूप से तो नहीं कहा गया है। हेमंत सोरेन ने जो आरोप लगाए है उसकी जांच होनी चाहिए, कि क्या वक्तव्य रहा और क्या वास्तविकता थी। क्योकि मेरी जानकारी में उनकी गिरफ्तारी उनके इस्तीफे के बाद दिखलाई गई है, ईडी ने उन्हे मौखिक रूप से कहा कि आपको डिटेन किया जाता है। लेकिन जब उन्होने इस्तीफा दिया उसके बाद आधिकारिक रूप से उनकी गिरफ्तारी ईडी ने दिखलाई है। ईडी को बताना चाहिए कि हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी कब हुई और राजभवन को बताना चाहिए कि उनका इस्तीफा कब हुआ।

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