राज्यपाल ने मॉब लिंचिंग विधेयक को वापस लौटाया

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March 17, 2022

रांची। राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड मॉब वायलेंस एंड मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 को वापस कर दिया है। राज्यपाल ने विधेयक कोराज्य सरकार को वापस करते हुए इसमें भीड़ शब्द को फिर से सही तरीके से पारिभाषित करने का निर्देश दिया है।
राज्यपाल ने करीब चार महीने इस विधेयक को अपने पास रखने के बाद विधि विभाग से परामर्श किया और सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद इसे वापस कर दिया है। राज्यपाल ने हिंदी और इंग्लिश के प्रारूप में अंतर की ओर भी सरकार का ध्यान इंगित किया है। अब फिर से सरकार को यह बिल जरूरी संशोधन करके राज्यपाल को भेजना होगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 21 दिसंबर को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राज्य की हेमंत सरकार ने इसे सदन से पारित करा कर इस कानून पर मुहर लगाने के लिए राज्यपाल के पास भेजा था। लेकिन आज करीब 87 दिन बाद राज्यपाल ने इस वापस कर दिया।
राज्यपाल ने जिस ‘भीड़’ शब्द को लेकर टिप्पणी करते हुए इसे पुनः पारिभाषित करने का निर्देश दिया है, इसको लेकर भाजपा पहले से भी मुखर रही है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 के माध्यम से जुर्माने के साथ संपत्ति की कुर्की और तीन साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किसर गसर है। अगर मॉब लिंचिंग में किसी की मौत हो जाती है, तो दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा होगी। गंभीर चोट आने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। उकसाने वालों को भी दोषी माना जाएगा और उन्हें तीन साल की सजा होगी। अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वालों को भी अपराधी माना जाएगा। साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा व पीड़ित के मुफ्त इलाज की व्यवस्था है।

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