गिरिडीह : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन के दौरान अभाविप कार्यकर्ता मंटू मुर्मू आदि की हुई पिटाई के मामले में गिरिडीह के एसपी डा.बिमल कुमार को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डा. आशा लकड़ा के समक्ष आगामी 28 अक्टूबर को पेश होना होगा। उन्हें जांच के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ न्यू सर्किट हाउस सर्कुलर रोड रांची बुलाया गया है।
मुर्मू ने बताया कि आयोग को पुलिस अधीक्षक ने गुमराह किया था, आयोग को लिखित में गिरिडीह एसपी ने ऐसा जवाब दिया था जैसे वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोई पदाधिकारी हों। बताया कि वह आदिवासी समुदाय से हैं उनका परिवार बहुत ही गरीब है। गत 21 अगस्त को झारखंड के 24 जिलों में छात्रों मुख्यमंत्री का पुतला दहन का कार्यक्रम था। वह भी इसी कार्यक्रम में गिरिडीह के झंडा मैदान में उपस्थित हुए थे क्योंकि वह भी एक छात्र हैं। झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार से वह भी पीड़ित हैं इसीलिए अभाविप ने भी पूरे प्रदेश भर में आंदोलन भी किया और मुख्यमंत्री आवास का घेराव भी किया था। परिषद का एक-एक कार्यकर्ता झारखंड के छात्र-छात्राओं के साथ है और संगठन ने समर्थन भी किया है।

मंटू मुर्मू के आवेदन पर आयोग ने लिया संज्ञान
आयोग की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को जारी समन के अनुसार, यह कार्रवाई मंटू मुर्मू के 23 अगस्त 2026 को दिये गये आवेदन के आधार पर की जा रही है। आवेदन में उन्होंने अपने ऊपर हुए कथित प्राणघातक हमले, जातिगत अपमान और उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। मंटू मुर्मू गिरिडीह जिले के ताराटांड़ थाना क्षेत्र के जोधपुर गांव के निवासी हैं। समन में आयोग की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी पूर्व नोटिस का भी उल्लेख किया गया है। आयोग ने मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के साथ पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
अनुपस्थिति पर कानूनी प्रावधानों का उल्लेख
समन में कहा गया है कि आयोग को दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं। बिना विधिसम्मत कारण के निर्देश का अनुपालन नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। आयोग ने इसके संदर्भ में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश ग्टप् के नियम 12 का उल्लेख किया है। अब 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों पर आयोग के समक्ष विचार किया जायेगा।





