धनबाद : झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (आरसीएमएस) एवं राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष मन्नान मलिक का मंगलवार सुबह रांची में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राज्य के राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। वे लंबे समय से श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे और धनबाद की राजनीति में उनका विशेष प्रभाव रहा।इससे पहले जनवरी 2025 में उनकी पत्नी शहीदा अहसन का निधन हुआ था।
हेमंत सरकार में मंत्री थे मन्नान मलिक
पूर्व मंत्री मन्नान मलिक झारखंड के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं, जो पूर्व में झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं।व्यक्तिगत और राजनीतिक में उन्होंने वर्ष 2009 में झारखंड की धनबाद विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था।

राजनीतिक पहचान: वह झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की सरकारों में सक्रिय रहे। इसके अलावा, 2009 के बाद हुए चुनावों में भी वे धनबाद से कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के रूप में सक्रिय रहे।मन्नान मलिक ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे लंबे समय तक कांग्रेस के धनबाद जिला अध्यक्ष रहे और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का कार्य किया। बाद में उन्हें झारखंड सरकार में मंत्री बनने का अवसर भी मिला, जहां उन्होंने जनहित और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
राजनीति के साथ-साथ मन्नान मलिक का श्रमिक आंदोलन से भी गहरा जुड़ाव रहा। राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कोयला क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। मजदूरों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर वेतन और कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। बीसीसीएल और कोयलांचल के श्रमिकों के बीच उनकी अलग पहचान और मजबूत पकड़ थी।
उनके निधन पर बेरमो विधायक जयमंगल सिंह, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की कार्यकारी अध्यक्ष अनुपमा सिंह, श्रमिक नेता बृजेंद्र प्रसाद सिंह, इंटक राष्ट्रीय सचिव वीरेंद्र प्रसाद अंबष्ट, महामंत्री एके झा, लगन देव यादव, सुरेंद्र यादव, मिथिलेश प्रसाद सिंह सहित अनेक राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें श्रमिक हितों का सशक्त प्रहरी, सरल व्यक्तित्व और संघर्षशील जननेता बताते हुए कहा कि उनके निधन से झारखंड की राजनीति और श्रमिक आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है।
शोक संदेशों में नेताओं ने कहा कि मन्नान मलिक ने जीवनभर संगठन, श्रमिक हित और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके विचार, संघर्ष और कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। उनके निधन से विशेष रूप से कोयलांचल क्षेत्र ने एक अनुभवी राजनेता, कुशल संगठनकर्ता और मजदूरों की बुलंद आवाज को खो दिया है।


