रांचीः झारखंड के साहिबगंज में ED ने एक बड़ी कार्रवाई की है। अवैध खनन मामले में ED ने 6 लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की है। ED के द्वारा जारी किए गए प्रेस रिलीज में बताया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रांची जोनल कार्यालय ने साहिबगंज में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और पत्थर खनिजों की बिना चालान वाले परिवहन के मामले की जांच के आधार पर धारा 44 और 45 के तहत PMLA विशेष न्यायालय, रांची के समक्ष अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है।
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यह शिकायत एम/एस सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरोपी संख्या 1), अशोक कुमार तुलस्यान, निदेशक (आरोपी संख्या 2), सिद्धार्थ तुलस्यान, एम/एस इको फ्रेंडली इंफ्रा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (ईएफआईटी) के निदेशक (आरोपी संख्या 3), चमन तुलस्यान, ईएफआईटी के निदेशक (आरोपी संख्या 4), पुरुषोत्तम कुमार तुलस्यान, निदेशक (आरोपी संख्या 5) और एम/एस इको फ्रेंडली इंफ्रा टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (आरोपी संख्या 6) के खिलाफ दायर की गई है। उक्त अभियोजन शिकायत में अपराध की आय के रूप में लगभग 5.39 करोड़ रुपये के जब्ती का प्रार्थना पत्र दायर की गई है।
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CBI द्वारा दर्ज की गई थी FIR
ईडी की जांच सीबीआई द्वारा पिरपैंती रेलवे साइडिंग, भागलपुर, बिहार पर अज्ञात रेलवे अधिकारियों तथा एम/एस सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ आईपीसी 1860 की विभिन्न धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आरंभ की गई थी। इस ईसीआईआर में पिरपैंती थाना, बिहार तथा मिर्जा चौकी थाना, साहिबगंज, झारखंड की तीन अतिरिक्त प्राथमिकियां विलय कर दी गईं।
ईडी की जांच में पाया गया कि एम/एस सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा उसके निदेशक 2015 से साहिबगंज के मौजा जोकमारी से बड़े पैमाने पर पत्थर खनिजों का अवैध निष्कर्षण एवं परिवहन कर रहे थे। उन्होंने पिरपैंती रेलवे साइडिंग से अनिवार्य जिम्स परिवहन चालान के बिना 251 रेल रेक भेजे, जिससे लगभग 11.29 करोड़ रुपये (पत्थर चिप्स) तथा 5.94 करोड़ रुपये (बोल्डर) के रॉयल्टी का चयन किया गया। रेलवे अधिकारियों सहित लोक सेवकों को रिश्वत देकर इस अवैध खनिजो को भेजने की सुविधा जुटाई गई और अपराध की आय को उसके बाद गैर-मौजूद फर्मों जैसे एम/एस डीएस बिटुमिक्स तथा एम/एस करण इंटरनेशनल—के फर्जी इनवॉइस के माध्यम से लेयर किया गया, जिनके खातों में एम/एस सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खातों से कुल लगभग 4.87 करोड़ रुपये के भुगतान भेजे गए, ताकि इसे अकिंचित संपत्ति के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।


