रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विश्व आर्थिक मंच में हिस्सा लेने दावोस जा रहे हैं । इसी दौरे में उनका विश्वविख्यात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भी जाने का कार्यक्रम है । झारखंड के लिए ये विश्वविद्यालय कई मायनों में खास है क्योंकि इसी यूनिवर्सिटी के सेंट जॉन्स कॉलेज से पढ़कर जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड आए और अलग राज्य की मांग रखी ।
गौरतलब है कि विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस में आयोजित वार्षिक बैठक में झारखंड की सहभागिता के पश्चात, झारखंड सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जनवरी 2026 में यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक यात्रा पर है। इस यात्रा के प्रमुख कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री का ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय झारखंड के राजनीतिक और बौद्धिक इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है।
मुख्यमंत्री की ऑक्सफोर्ड यात्रा केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह झारखंड की स्थापना के मूल विचारों और उसकी समकालीन शासन प्राथमिकताओं के बीच संस्थागत निरंतरता को रेखांकित करती है। यह यात्रा इतिहास, शिक्षा और सार्वजनिक नेतृत्व के बीच गहरे संबंध को पुनः स्थापित करती है।
इस ऐतिहासिक संबंध की शुरुआत वर्ष 1922 में हुई थी, जब वर्तमान झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र में जन्मे जयपाल सिंह मुंडा सेंट जॉन्स कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई के लिए पहुँचे। एक आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले जयपाल सिंह मुंडा के लिए उस समय ऑक्सफोर्ड जैसी वैश्विक संस्था तक पहुँचना असाधारण उपलब्धि थी। औपनिवेशिक शासन के दौर में स्वदेशी और वंचित समुदायों के लिए अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा तक पहुँच अत्यंत सीमित थी।
ऑक्सफोर्ड में जयपाल सिंह मुंडा ने दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया, ऑक्सफोर्ड यूनियन डिबेटिंग सोसाइटी के अध्यक्ष रहे तथा हॉकी में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए उच्चतम खेल सम्मान प्राप्त किया। वह ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। इन वर्षों का अनुभव उनके जीवन में लम्बे समय तक रहा । वे आदिवासी अधिकारों के सशक्त प्रवक्ता बने, संविधान सभा में वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व किया और उस आंदोलन में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में जयपाल सिंह मुंडा को एक विशिष्ट पूर्व छात्र के रूप में मान्यता प्राप्त है। सेंट जॉन्स कॉलेज के अभिलेखों और हॉल ऑफ फेम में उनका नाम अकादमिक, खेल और सार्वजनिक नेतृत्व के क्षेत्र में योगदान के लिए दर्ज है। झारखंड में वे मरांग गोमके के रूप में स्मरण किए जाते हैं, जिनके विचार सम्मान, अधिकार और स्वशासन के मूल्यों के रूप में आज भी राज्य की चेतना को दिशा देते हैं।
इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री का ऑक्सफोर्ड कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। अपने दौरे के दौरान माननीय मुख्यमंत्री सेंट जॉन्स कॉलेज और ऑल सोल्स कॉलेज सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से संवाद करेंगे तथा ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में सार्वजनिक नीति और शासन से जुड़े विषयों पर विशेष व्याख्यान और परिचर्चा में भाग लेंगे। ये संवाद झारखंड की समावेशी विकास, शिक्षा और संस्थागत क्षमता निर्माण की प्राथमिकताओं को वैश्विक विमर्श से जोड़ते हैं।
यह यात्रा इस बात को भी दर्शाती है कि झारखंड ने जयपाल सिंह मुंडा की शैक्षणिक विरासत को सार्वजनिक नीति में रूपांतरित किया है। मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ओवरसीज़ स्कॉलरशिप और यूनाइटेड किंगडम सरकार के सहयोग से संचालित चेवनिंग–मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों और अन्य वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसर प्रदान कराए जा रहे हैं।




