डेस्कः कांग्रेस पार्टी ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह को पार्टी ने निकाल दिया है। कांग्रेस के डिसिप्लिनरी कमिटी के अध्यक्ष तारिक अनवर की सिफारिशों के बाद पार्टी ने उन्हे सात सालों के लिए निष्कासित कर दिया है। लक्ष्मण सिंह ने नेता प्रतिपक्ष और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया था।
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वहीं दूसरी ओर दूसरी ओर दिग्विजय सिंह ने पार्टी के कार्यक्रमों में मंच पर नहीं बैठने का फैसला किया है। हुए कांग्रेस के जय हिंद सभा में दिग्विजय सिंह मंच पर नहीं बैठे, तो जबलपुर कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने उनके पैर तक छूकर उनसे मंच पर बैठने के लिए कहा, लेकिन दिग्विजय सिंह इसके लिए तैयार नहीं हुए। अब दिग्विजय सिंह ने मंच पर न बैठने की 7 वजहें गिनाई हैं. दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया साइट पर मंच पर न बैठने के बारे में विस्तार से लिखा है। पढ़िए आखिर पूर्व सीएम ने क्या बताई वजहें…
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दिग्विजय सिंह ने लिखा, यह निर्णय अनुशासन, सेवा के लिए
दिग्विजय सिंह ने लिखा “मेरा मंच पर न बैठने का निर्णय केवल व्यक्तिगत विनम्रता नहीं बल्कि संगठन को विचारधारात्मक रूप से सशक्त करने की सोच को लेकर उठाया गया कदम है। यह निर्णय कांग्रेस की मूल विचारधारा, अनुशासन और सेवा का प्रतीक है। आज कांग्रेस का कार्य करते हुए कार्यकर्ताओं को नया विश्वास और हौसला चाहिए। इसके लिए संगठन में जितनी सादगी होगी उतनी सुदृढ़ता आएगी।
मैंने मध्य प्रदेश में 2018 में “पंगत में संगत” और 2023 में “समन्वय यात्रा” के दौरान भी मंच से परहेज किया। जिसका एकमात्र उद्देश्य रहा है कि कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच कोई दूरी न रहे और भेदभाव पैदा करने वालों को सामंजस्य की सीख दी जा सके। खुद राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहते हुए ऐसी मिसाल प्रस्तुत कर चुके हैं।
17 मार्च 2018 को दिल्ली में तीन दिवसीय कांग्रेस का पूर्ण राष्ट्रीय अधिवेशन इस बात का गवाह रहा है। उस अधिवेशन में राहुल, सोनिया गांधी सहित सभी वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मंच से नीचे दीर्घा में ही बैठे थे। यहां तक स्वागत-सत्कार भी मंच से नीचे उनके बैठने के स्थान पर ही हुआ। मैं समझता हूं, वह फैसला कांग्रेस पार्टी का सबसे सफलतम प्रयोग था।




