डेस्कः अच्छे से हो गया ना सारा काम…. मुझे वीडियो भी भेज देना….. अभी और कितना टाइम लगेगा! ये अजीब सी जल्दी दिखाते शब्द एक बेटी के है, जो अपने पिता की जलती चिता मोबाइल फोन की स्क्रीन से देख रही है। शिवचरण गुप्ता कभी मुंबई के बड़े कपड़ा कारोबारियों में गिने जाते थे। तीन बेटियों को पढ़ाया, धूमधाम से शादी की, लेकिन व्यापार में नुकसान क्या हुआ, अपनों का रंग बदल गया। मजबूरी में पत्नी के साथ सोनीपत के वृद्धाश्रम में आना पड़ा। वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि मंगलवार की सुबह बुजुर्ग के निधन के बाद उनकी तीन बेटियों को सूचना दी गई। नेपाल के रहने वाली बड़ी बेटी ने दूरी का हवाला दिया, जबकि उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ में रहने वाली दूसरी बेटी ने भी आपे में असमर्थता जता दी। मुंबई ने रहने वाली सबसे छोटी ने कहा कि इतनी जल्दी पहुंचना संभव नहीं, इसलिए अंतिम संस्कार वीडियो कॉल पर ही दिखा दो। जो इंसान कभी करोड़ों के फैसले करता था, उसकी मौत की सूचना पर किसी बेटी के मुंह से यह नहीं निकला कि मैं आ रही हूं। ऑनलाइन 51,00 रुपये भेजकर कह दिया कि अंतिम संस्कार करा दिया। तब समाज कल्याण शिक्षा समिति के आश्रम संचालकों व स्थानीय समाजसेवियों ने बेटे का फर्ज निभाया। समाजसेवी नरेंद्र भुटानी, प्रवीन वर्मा, मंजीत, एसआई जगत सिंह ने रीति- रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।
आश्रम संचालक आनंद कुमार के अनुसार, बेटियों ने ऑनलाइन 5100 रुपए भेजकर अंतिम संस्कार सोनीपत में ही कराने के लिए कहा। जब मुखाग्नि देने की बात उठी तो उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए पूरी प्रक्रिया दिखाने को कहा। आनंद कुमार ने बताया कि अपने पिता के प्रति संतानों का ऐसा व्यवहार उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उनके मुताबिक, वीडियो कॉल पर पिता का चेहरा देखते ही एक बेटी के मुंह से सिर्फ इतना निकला, “पापा…”।
आनंद कुमार ने बताया कि जब बेटियों से कहा गया कि वे 20 तारीख से पहले आकर अपने पिता की अस्थियां ले जाएं, तो मुंबई में रहने वाली सबसे छोटी बेटी ने जवाब दिया, “20 तारीख से पहले देखते हैं।”
आश्रम संचालक के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान भी बेटी फोन पर लगातार जानकारी लेती रही। उन्होंने बताया कि जब चिता को अग्नि दी जा रही थी, तब बेटी ने पूछा, “अभी और कितना टाइम लगेगा?” इस पर उसे बताया गया कि मुखाग्नि दी जा चुकी है और 10-15 मिनट में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद बेटी ने कहा, “सारा काम अच्छे से हो गया ना, मुझे सारी वीडियो भेज देना।”
5100 रुपये भेजे और वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार देख लिया💔
ये घटना सुन के इंसान की आत्मा रो पड़ेगी😢
मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता, 74 साल,पिछले 3 साल से सोनीपत के वृद्धाश्रम में थे।
2 साल पहले उनकी पत्नी का भी यहीं निधन हुआ था।मंगलवार को जब आश्रम ने मौत… pic.twitter.com/kKpLWzJ9WK
— Sachin Verma🐦 (@itSachinverma) August 5, 2026
कपड़ों के बड़े व्यापारियों में आता था शिवचरण का नाम
महाराष्ट्र के मुंबई में कभी शिवचरण रामरत्न गुप्ता का नाम कपड़ों के बड़े व्यापारियों में गिना जाता था। परिवार में पत्नी और तीन बेटियां—नीता, निशा और प्रिया थीं। शिवचरण और उनकी पत्नी ने बेटियों को बेटों की तरह ही पाला। उन्होंने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उनकी पढ़ाई पर खर्च किया, उन्हें ग्रेजुएशन तक पढ़ाया और फिर धूमधाम से उनकी शादी कर दी।
समय के साथ व्यापार में भारी नुकसान हुआ और शिवचरण आर्थिक संकट में घिर गए। हालात लगातार बिगड़ते गए। आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिवचरण और उनकी पत्नी को महाराष्ट्र छोड़कर सोनीपत आना पड़ा, जहां उन्होंने एक वृद्धाश्रम में शरण ली।
पत्नी का साथ भी छूटा, फिर दूसरे आश्रम में रहने लगे
करीब तीन साल पहले शिवचरण अपनी पत्नी के साथ सोनीपत के सेक्टर-7 स्थित एक वृद्धाश्रम में रहने आए थे। आश्रम आने के करीब एक साल बाद उनकी पत्नी का निधन हो गया। पत्नी के निधन के बाद शिवचरण अकेले पड़ गए। बाद में उनका मन वहां नहीं लगा तो करीब दो साल पहले वे वेस्ट रामनगर स्थित ‘समाज कल्याण शिक्षा समिति’ के आश्रम में रहने चले गए। यहां वे 24 अन्य बुजुर्गों के साथ रह रहे थे।
पेट में दर्द की शिकायत हुई, अगली सुबह मृत मिले
आश्रम संचालक आनंद कुमार ने बताया कि शिवचरण समय-समय पर अपनी बेटियों से फोन पर बात कर लिया करते थे। करीब 15 दिन पहले उनके पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में पेट में संक्रमण मिला। इलाज के बाद उनकी तबीयत में कुछ सुधार हुआ, लेकिन रविवार को उन्हें फिर गैस की शिकायत हुई।
डॉक्टरों ने दवा देकर उन्हें घर भेज दिया। सोमवार रात उन्होंने सामान्य रूप से भोजन किया और अपने कमरे में सो गए। मंगलवार तड़के करीब 3 बजे वे बाथरूम गए और लौटकर फिर सो गए। सुबह करीब 3:30 बजे जब आश्रम के केयरटेकर शिवकुमार उन्हें देखने पहुंचा तो वे अचेत मिले। जांच करने पर उनकी मौत हो चुकी थी।
नहीं आ सकते, फोन पर ही अंतिम संस्कार दिखा दीजिए
आश्रम के संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, जैसे ही शिवचरण की मृत्यु की पुष्टि हुई, उन्होंने तुरंत सबसे छोटी बेटी प्रिया को फोन मिलाया। संचालक को लगा कि खबर सुनते ही बेटियां रो पड़ेंगीं और पहली फ्लाइट या ट्रेन पकड़कर दौड़ी चली आएंगी। मगर, तीनों बेटियों में से किसी ने भी आने की इच्छा तक नहीं जताई।
बड़ी बेटी नीता इन दिनों नेपाल में रहती हैं। उसने कॉल पर कहा- “बहुत दूर हूं, आना संभव नहीं”। यूपी के आजमगढ़ में रहने वाली मंझली बेटी निशा ने कहा- “मैं नहीं पहुंच सकती”। मुंबई में रहने वाली छोटी बेटी प्रिया ने सबसे शॉकिंग जवाब दिया। बोलीं- “हम इतनी जल्दी नहीं आ सकते, आप फोन पर ही अंतिम संस्कार दिखा दीजिए।”
अब जब पिता ही नहीं रहे, तो आकर क्या करेंगे?
इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में एक बेटी अंतिम संस्कार की कुछ वीडियोज भेजने की बात करती नजर आ रही है। वह यह भी पूछती है कि अंतिम संस्कार में और कितना वक्त लगेगा। जानकारी के मुताबिक बेटियों ने पहले पिता की अस्थियों को संभालकर रखने को कहा था, लेकिन बाद में फिर फोन करके कहा कि उनके पास आने का वक्त नहीं है, इसलिए वृद्धाश्रम वाले ही उन अस्थियों को गंगा जी में प्रवाहित कर दें।






