सीपी राधाकृष्णन ने झारखंड में राज्यपाल रहते स्थानीय नीति के विधेयक को नहीं दी थी स्वीकृति, हेमंत सोरेन ने अपनी गिरफ्तारी में भी बताई थी भूमिका

सीपी राधाकृष्णन ने झारखंड में राज्यपाल रहते स्थानीय नीति के विधेयक को नहीं किया था स्वीकृत, हेमंत सोरेन ने अपनी गिरफ्तारी में भी बताई थी भूमिका

रांचीः तमिलनाडू के रहने वाले और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार है। 17 साल की उम्र में ही आरएसएस से जुड़ने वाले सीपी राधाकृष्णन दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके है, उनके समर्थक उन्हे तमिलनाडू का मोदी भी कहते है।

Breaking News: झारखंड के गवर्नर रहे चुके सीपी राधाकृष्णन होंगे एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार
सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल होने से पूर्व झारखंड के राज्यपाल रह चुके है। अगर वो उपराष्ट्रपति का चुनाव जीत जाते है तो राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के बाद उपराष्ट्रपति जैसे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठने वाले दोनों की शख्सियत ऐसे होंगे जो झारखंड के राज्यपाल रह चुके है। झारखंड में राज्यपाल रहते हुए सीपी राधाकृष्णन से जुड़े कई विवाद और चर्चाएं सुर्खियों में रही। वो 18 जुलाई 2023 से 30 जुलाई 2024 तक लगभग डेढ़ साल झारखंड के राज्यपाल रहे।

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झारखंड में सीपी राधाकृष्णन के राज्यपाल रहने के दौरान ही तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जो वर्तमान में भी मुख्यमंत्री है उनकी 31 जनवरी 2024 को कथित जमीन घोटाले में गिरफ्तारी हुई थी। अपनी गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के फ्लोर टेस्ट के दौरान हेमंत सोरेन ने विधानसभा के अंदर अपनी गिरफ्तारी में राजभवन की भूमिका पर सवाल उठाया था। हालांकि सीपी राधाकृष्णन से बाद में मीडिया के सामने आकर इस बात का खंडन किया था कि मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी में उनकी कोई भूमिका है। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी सरकार बनाने में देरी को लेकर राज्यपाल की मंशा पर सवाल उठाया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से मीडिया में कहा गया था कि बिहार की तरह झारखंड में भी सत्ता पलटने की साजिश रची जा रही थी। चंपाई सोरेन ने एक फरवरी 2024 को ही सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था लेकिन 26 घंटे से ज्यादा के बाद राज्यपाल ने उन्हे सरकार बनाने का मौका दिया।

 

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यहीं नहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कथित विधानसभा सदस्यता रद्द किये जाने के मामले को लेकर भी मीडिया में समय-समय पर खबरें चलती रही। रमेश बैस के राज्यपाल रहते हुए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के कथित मामले को लेकर आई चिट्ठी का सस्पेंश सीपी राधाकृष्णन के राज्यपाल रहने के दौरान भी जारी रहा। 2022 में तो इस मामले को लेकर रांची से रायपुर सत्तापक्ष के विधायकों को भेजा गया था। सीपी राधाकृष्णन के कार्यकाल में भी इस चिट्ठी पर सस्पेंश कायम रहा है सरकार की अस्थिरता को लेकर मीडिया में तमाम तरह की खबरें चलती रही।

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इतना ही नहीं सीपी राधाकृष्णन ने झारखंड के राज्यपाल रहते हुए विधानसभा से पारित 1932 आधारित खातियान और स्थानीय नियोजन नीति, ओबीसी आरक्षण, निजी विवि जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना स्वीकृति के वापस कर दिया था। इसके साथ ही उन्होने 24 जुलाई 2023 को एक कार्यक्रम में कहा था कि झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ बहुत ही खतरनाक है, इनकी घुसपैठ से आदिवासी लोगों की पूरी जीवनशैली बदल जायेगी। राज्यपाल के इस बयान को विपक्ष यानी बीजेपी ने हाथोंहाथ लिया था और उसे चुनावी एजेंडा बना दिया था। हालांकि इस मुख्य चुनावी एजेंडा का बीजेपी को विधानसभा चुनाव में कोई फायदा नहीं हुआ। झारखंड में सीपी राधाकृष्णन के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और उनके द्वारा विधानसभा के अंदर गिरफ्तारी में राजभवन की भूमिका वाला बयान सबसे विवादित रहा था। हालांकि बाद में हेमंत सोरेन के जेल से छूटने के बाद सीपी राधाकृष्णन को महाराष्ट्र का राज्पाल बनाया गया और अब वो उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार है।

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