डेस्कः एपस्टीन फाइल्स के नए दस्तावेज शुक्रवार को जारी किए गए। इन दस्तावेजों से जुड़ी कहानियां शनिवार को एक-एक कर सामने आने लगी हैं। सबसे खास बात ये है कि अब प्रधानमंत्री मोदी के नाम का जिक्र भी एपस्टीन फाइल्स में आ गया है। दस्तावेजों में जिक्र है कि पीएम मोदी ने इस कुख्यात यौन शोषण अपराधी एपस्टीन से सलाह ली थी। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को शनिवार शाम जोरशोर से उठाते हुए इसे राष्ट्रीय शर्म बताया है।एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के उल्लेख को भारतीय विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जुलाई 2017 में पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के तथ्य के अलावा, ईमेल में बाकी सब बातें मनगढ़ंत हैं। विदेश रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये सारी बातें एकदम बकवास हैं और इनको नजरअंदाज करना ही बेहतर है।
Statement by the Official Spokesperson to clarify certain reports:
We have seen reports of an email message from the so-called Epstein files that has a reference to the Prime Minister and his visit to Israel. Beyond the fact of the Prime Minister’s official visit to Israel in… pic.twitter.com/ZOZSwE1AZA
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 31, 2026
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि एपस्टीन के एक दस्तावेज में प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र है। खेड़ा के अनुसार, एपस्टीन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी 'सलाह' ली और इसराइल में 'नाचे और गाए' किया जो अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए था, साथ ही उसने 'IT WORKED!' शब्द भी लिखा।
खेड़ा ने इसे 'राष्ट्रीय शर्म' की बात बताते हुए कहा कि यह जजमेंट, पारदर्शिता और कूटनीतिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रधानमंत्री और एपस्टीन के बीच 'सीधा अस्पष्ट संबंध' दर्शाता है, जो एक दोषी मानव तस्कर, बाल यौन अपराधी और सीरियल यौन ऑफेंडर थे। इससे देश की गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है।
On 24th May 2019, just days before Modi took oath as the PM of India for the second time, Jeffery Epstein told Steve Bannon that:
1. He had an ‘interesting’ meeting with Modi.
2. Modi told him that no one in Wash (Washington) speaks to him.
3. Modi told him that main enemy is… pic.twitter.com/XeKehAacav— Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) January 31, 2026
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मोदी सरकार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सामने आने के बाद उसे बकवास बताते हुए किसी भी प्रकार की आशंका को तुरंत खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमें तथाकथित एपस्टीन फाइलों से संबंधित एक ईमेल संदेश की रिपोर्ट मिली है। जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी इसराइल यात्रा का जिक्र है। जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इसराइल की आधिकारिक यात्रा के अलावा, ईमेल में बाकी सभी बातें एक दोषी अपराधी की तुच्छ बकवास मात्र हैं, जिन्हें पूरी तरह से नकारा जाना चाहिए।" भारतीय विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा एपस्टीन से संबंधित अपनी जांच फाइलों से बड़ी मात्रा में नए रिकॉर्ड जारी करने के कुछ घंटों बाद आई है।
उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर मौजूद दस्तावेज का लिंक भी साझा किया और कहा कि यह एपस्टीन फाइल्स के हिस्से के रूप में जारी किया गया है।
कांग्रेस का यह हमला ऐसे समय में आया है जब हाल के महीनों में एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें विभिन्न विश्व नेताओं और हस्तियों के नामों का जिक्र है। हालांकि, रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट नहीं है कि मोदी का नाम किसी आपराधिक संदर्भ में है या केवल एपस्टीन की नेटवर्किंग प्रयासों में।
प्रधानमंत्री कार्यालय या भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद राजनीतिक गलियारों में गरमा सकता है, क्योंकि कांग्रेस इसे मोदी सरकार की विदेश नीति और व्यक्तिगत संबंधों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
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इसराइली खुफिया एजेंसियों की पहुंच ट्रंप तक
इससे पहले शनिवार को ट्रंप और बिल गेट्स से जुड़े मामले एपस्टीन फाइल्स के जरिए सामने आए। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन फाइल्स में एक कथित एफबीआई (FBI) रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें दावा किया गया है किट्रंप इसराइल द्वारा 'कॉम्प्रोमाइज' (प्रभावित) किए गए थे। फाइल्स के मुताबिक, एपस्टीन ने दावा किया था कि ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के माध्यम से इसराइली खुफिया एजेंसियां ट्रंप तक पहुंच रखती थीं। इस रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि एपस्टीन के पास ट्रंप से जुड़ी कुछ संवेदनशील जानकारियां थीं, जिनका इस्तेमाल प्रभाव डालने के लिए किया जा सकता था। हालांकि, ट्रंप की टीम ने इन दावों को हमेशा की तरह आधारहीन और राजनीति से प्रेरित बताया है।
दूसरी ओर, इन दस्तावेजों में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल बिल गेट्स को लेकर भी बेहद निजी और विवादास्पद दावे किए गए हैं। फाइल्स के अनुसार, जेफ्री एपस्टीन ने दावा किया था कि बिल गेट्स ने रूसी युवतियों के साथ संबंध बनाए थे, जिसके बाद उन्हें एक यौन संचारित रोग (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज- STD) हो गया था।
एपस्टीन ने आरोप लगाया कि गेट्स ने एंटीबायोटिक्स मांगे ताकि वे अपनी तत्कालीन पत्नी मेलिंडा गेट्स को चुपके से दे सकें। एक ईमेल में एपस्टीन ने खुद को गेट्स के सलाहकार बोरिस निकोलिक के रूप में पेश करते हुए लिखा कि उन्होंने गेट्स को "रूसी लड़कियों" से सेक्स के परिणामों से निपटने के लिए दवाएं दिलाईं और अन्य "नैतिक रूप से अनुचित" कामों में मदद की। एपस्टीन ने गेट्स से रिश्ता खत्म करने पर नाराजगी भी जताई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन इन जानकारियों का इस्तेमाल बिल गेट्स को धमकाने या ब्लैकमेल करने के लिए करना चाहता था, ताकि गेट्स उसके चैरिटी फंड में निवेश करें।
बिल गेट्स का पक्ष इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बिल गेट्स के प्रवक्ता ने कहा है कि ये दावे पूरी तरह से झूठे हैं। गेट्स पहले भी स्वीकार कर चुके हैं कि एपस्टीन से मिलना उनकी एक "बड़ी गलती" थी, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह के अवैध कृत्य या एपस्टीन के साथ घनिष्ठ संबंधों से हमेशा इनकार किया है।
जेफ्री एपस्टीन की फाइल्स के लगातार सार्वजनिक होने से अमेरिका के कई प्रभावशाली लोग जांच के घेरे में आ रहे हैं। हालांकि इन फाइल्स में किए गए दावों की सत्यता की पुष्टि अभी भी एक कानूनी और जांच का विषय है, लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
ये फाइलें एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी की गई हैं, जिसमें सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने का प्रावधान है। हालांकि, इनमें कई जगह रेडैक्शन हैं और दावे ज्यादातर अपुष्ट हैं। एपस्टीन 2019 में जेल में सुसाइड कर चुके हैं, जबकि उनकी जांच में कई हाई-प्रोफाइल नाम सामने आते रहे हैं।


