डेस्कः मुजफ्फरपुर में योग गुरु बाबा रामदेव उर्फ रामकृष्ण यादव के एक बयान को लेकर उनपर परिवाद दायर हुआ है। दरअसल रामदेव बाबा के खिलाफ मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। हक-ए-हिन्दुस्तान मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में यह परिवाद दायर किया है। न्यायालय ने परिवाद स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है।
धार्मिक भावनाएं आहत: परिवाद में आरोप लगाया गया है कि 13 जुलाई 2026 की रात प्रसारित एक संबोधन में बाबा रामदेव ने कहा था कि “हिंदू और मुसलमानों का बाप एक है तथा मुसलमानों का मूल भी हिंदुओं से है”। परिवादी का कहना है कि इस बयान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इससे समाज में धार्मिक वैमनस्य तथा उन्माद फैलने की आशंका है।
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कार्रवाई की मांग: तमन्ना हाशमी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 और 302 के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए न्यायालय में परिवाद दायर किया है। यह परिवाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 212 के तहत दाखिल किया गया है। परिवाद में न्यायालय से मामले का संज्ञान लेकर विधिसम्मत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
समाज को बांटने वाला बयान: परिवाद दायर करने के बाद तमन्ना हाशमी ने कहा कि बाबा रामदेव का बयान समाज को बांटने वाला है। उनका आरोप है कि इस तरह के बयान से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच भेदभाव और तनाव पैदा करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि इसी कारण आहत होकर उन्होंने मुजफ्फरपुर के सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर किया है।
न्यायालय ने स्वीकार किया परिवाद: हाशमी ने बताया कि न्यायालय ने परिवाद स्वीकार कर लिया है और मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।अब अदालत में सुनवाई के दौरान परिवादी के पक्ष को सुना जाएगा, जिसके बाद न्यायालय आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लेगा।
बाबा रामदेव की प्रतिक्रिया नहींं: फिलहाल इस मामले में बाबा रामदेव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। देखना होगा कि बाबा रामदेव के खिलाफ ये मामला आगे कौन सा मोड़ लेता है।


