रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को 319 सहायत आचार्यों और 19 महिला पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया। प्रोजेक्ट भवन में हुए इस समारोह में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और श्रम एवं नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव के साथ मुख्य सचिव अविनाश कुमार और अन्य अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा देखा जाता है कि कुछ शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते है, अगर ऐसा है तो ऐसी सोच के साथ समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में करीब 2 लाख नौकरियां दी गई और वर्तमान कार्यकाल में भी फरवरी से नियुक्तियां शुरू हो गई है जो आने वाले समय में और तेजी से होगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नव-नियुक्त सहायक आचार्यों से आशा है कि वे पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। विशेष रूप से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर शिक्षा और अवसर पहुँचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुँचाने का माध्यम है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कुछ शिक्षक कतराते हैं। ऐसी सोच के साथ समग्र विकास संभव नहीं है। यदि हम अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से कंधों पर लें, तभी बदलाव आएगा। आप देखेंगे कि मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहल इसीलिए की गई है ताकि बच्चों को बेहतर भविष्य दिया जा सके। आने वाली पीढ़ी को शिक्षित, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाने के लिए आप सभी के कंधों पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जहां देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक जैसी घटनाओं से नियुक्तियां बाधित हो रही हैं, वहीं अबुआ सरकार ने शिक्षा विभाग में ही पिछले चार महीनों में 9 हजार से अधिक और विगत दो वर्षों में 16 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है।जबकि हमारे पूर्व के कार्यकाल में सरकारी, अनुबंध एवं निजी संस्थानों में करीब दो लाख नियुक्तियां की गईं।अपने दूसरे कार्यकाल वर्ष 2024 में सरकार के गठन के बाद से मानव संसाधन को सशक्त करने के लिए विभिन्न विभागों में लगातार नियुक्तियां की गई हैं, और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
मंईयां सम्मान योजना की राशि से महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर
मुख्यमंत्री ने आगे मंईयां सम्मान योजना से महिलाओं को हो रहे आर्थिक मदद से उनके जीवन में आये बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि आधी आबादी को मुख्यधारा में शामिल किए बिना राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। वर्तमान में राज्य की 50 लाख से अधिक महिलाओं को झारखण्ड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति माह 2500 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।हमें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि आज इस योजना का लाभ लेने वाली बेटियां कलेक्टर जैसे पदों तक भी पहुंच रही हैं।महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का कार्य भी निरंतर हो रहा है। अब वह समय बीत चुका है जब महिलाओं को चारदीवारी के भीतर सीमित रखा जाता था। आज उन्हें आगे आना है, और समाज को भी उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है।


