रांचीः झारखंड के सरकारी स्कूलों की परीक्षा को लेकर अब विकास आयुक्त बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर जल्द ही विकास आयुक्त जैक और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा आठवीं, नौवीं व ग्यारहवीं की परीक्षा अबतक नहीं हुई और न ही इसकी तिथि घोषित हुई है। इस कारण परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इन कक्षाओं की अबतक अर्द्ध वार्षिक परीक्षा भी नहीं हुई है।
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इधर जैके ने 10 दिनों में अपनी कार्ययोजना बदल दी। जैक ने पहले 13 नवंबर को परीक्षा को लेकर विभाग को कार्ययोजना सौंपी थी। विभाग ने जब कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी तो फिर 22 नवंबर को जैक ने एक और पत्र भेजा। जिसमें अगले वर्ष की परीक्षा ओआरएम शीट पर पूर्व की भांती लेने की बात कही गयी। अब विकास आयुक्त की देखरेख में होनेवाली बैठक में परीक्षा का पैटर्न और उसके आयोजन को लेकर अंतिम ढंग से निर्णय लिया जायेगा। बैठक में परीक्षा को लेकर विभाग के प्रस्ताव और जैक की आपत्ति पर विचार किया जायेगा। बैठक में लिये गये निर्णय के अनुरूप आगे परीक्षा की प्रक्रिया फाइनल की जायेगी। राज्य में कक्षा एक से सात तक के स्कूली बच्चों की परीक्षा 16 दिसंबर से प्रस्तावित है। ऐसे में कक्षा आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं की परीक्षा पर भी अंतिम निर्णय होने से अगले माह इन कक्षाओं की भी अर्द्ध वार्षिक परीक्षा ली जा सकेगी।
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विभाग ने तैयार किया था प्रस्ताव, जैक ने की थी आपत्तिः राज्य में पिछले वर्ष आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा नहीं हुई थी। इसके साथ ही मैट्रिक और इंटर की प्री-बोर्ड भी नहीं हुई थी। विभाग ने इस वर्ष इन परीक्षाओं को लेकर प्रस्ताव बनाया, जिसमें इन कक्षाओं की अर्द्धवार्षिक और वार्षिक दोनों परीक्षाओं के साथ-साथ मैट्रिक और इंटर की प्री-बोर्ड परीक्षा का प्रावधान था। जैक ने शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं की परीक्षा लेने पर आपत्ति जताई। जैक का कहना था कि इन परीक्षाओं का आयोजन पहले से वही करता रहा है, ऐसे में वर्तमान में यह परीक्षा जैक द्वारा ली जायेगी। जैक की आपत्ति के बाद प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इधर शिक्षा विभाग ने जैक से परीक्षा को लेकर कार्ययोजना मांगी थी। जैक ने कक्षा आठवीं, नौवीं और ग्यारहवहीं की वार्षिक परीक्षा दो टर्म में अलग-अलग पैटर्न पर लेने के लिए प्रस्ताव सौंपा था। इसके बाद फिर दूसरा प्रस्ताव सौंपा।




