प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के सुप्रीमो दिनेश गोप, उसकी पत्नी शकुंतला कुमारी, हीरा देवी समेत कुल 20 अन्य लोगों और शेल कंपनियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दायर की है। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की है। इस शिकायत में दिनेश गोप सहित सभी 20 आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया है।
आरोप है कि इन्होंने हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी (एक्सटॉर्शन) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 के तहत आतंकी कृत्यों जैसे संगठित आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देकर लगभग ₹20 करोड़ की अवैध संपत्ति (अपराध की आय) अर्जित की।
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₹3.36 करोड़ की मनी लाउंड्रिंग का पता चला: ईडी की जांच में सामने आया है कि पीएलएफआई द्वारा झारखंड और पड़ोसी राज्यों के ठेकेदारों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से हिंसा, आगजनी और धमकी के जरिए व्यवस्थित रूप से लेवी (रंगदारी) वसूली जाती थी। अनुमान है कि इस संगठित जबरन वसूली से कुल ₹20 करोड़ की अवैध आय अर्जित की गई। ईडी अब तक इस अवैध आय में से ₹3.36 करोड़ की मनी लाउंड्रिंग का पता लगा चुकी है।
जांच के दौरान दिनेश गोप की इस पूरी आपराधिक गतिविधियों के संचालन की परतें खुली हैं। पता चला है कि गोप ने अपनी दो पत्नियों, शकुंतला कुमारी और हीरा देवी को आगे करके शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया था। इन कंपनियों का कोई वैध व्यवसाय नहीं था, लेकिन इनका इस्तेमाल भारी मात्रा में अवैध नकद राशि को बैंकिंग प्रणाली में जमा करने के लिए किया गया।
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अपराध की आय के स्रोत को छुपाने के लिए इन फंडों को हवाला लेनदेन, स्थानीय मनी ट्रांसफर ऑपरेटरों के नेटवर्क और तीसरे पक्ष के व्यवसायों सहित कई जटिल तरीकों से घुमाया गया। अंत में, इस धन का उपयोग लग्जरी वाहन और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी उच्च-मूल्य वाली संपत्ति खरीदने और परिवार के व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया, जिससे अवैध धन को वैध अर्थव्यवस्था में मिला दिया गया।
ईडी ने यह जांच झारखंड पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दिनेश गोप और उसके सहयोगियों के खिलाफ दायर कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी। इससे पहले, ईडी ने पीएलएफआई के एक प्रमुख सहयोगी निवेश कुमार के खिलाफ भी एक आरोप पत्र दायर किया था, जिस पर ₹4 करोड़ से अधिक की अवैध आय को लॉन्डर करने का आरोप था।
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इसमें ₹2 करोड़ सीधे दिनेश गोप से हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए प्राप्त किए गए थे। इसके बाद ईडी ने 20 अगस्त, 2025 को दिनेश गोप को गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट से दिनेश गोप और अन्य 20 आरोपियों के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग के अपराध के लिए मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है। साथ ही, ₹3.36 करोड़ के अपराध से अर्जित संपत्ति (जिसमें जब्त की गई नकदी, बैंक बैलेंस और वाहन शामिल हैं) को जब्त (कॉन्फिस्केट) करने की मांग भी की गई है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
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