केंद्र सरकार ने भारतीय के लिए जारी की एडवाइजरी,अगली सूचना तक नेपाल नहीं जाएं

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September 9, 2025

केंद्र सरकार ने भारतीय के लिए जारी की एडवाइजरी,अगली सूचना तक नेपाल नहीं जाएं

डेस्कः नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों पर भारत सरकार सतर्क है। नेपाल में बढ़ती अशांति में कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई दिनों तक चले हिंसक प्रदर्शनों और विवादास्पद सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाद इस्तीफा दे दिया है। भारी विरोध के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि भारतीय नागरिकों को स्थिति सामान्य होने तक नेपाल की यात्रा टाल देनी चाहिए। जो लोग पहले से ही इस हिमालयी देश में हैं, उन्हें घर के अंदर रहने और सड़कों पर न निकलने की सलाह दी गई है।

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निर्देश और नियमों का करें पालन
बयान में आगे कहा गया है कि काठमांडू और नेपाल के कई अन्य शहरों में अधिकारियों ने कर्फ्यू लागू कर दिया है। नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और नेपाली अधिकारियों के निर्देशों व नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सहायता की आवश्यकता वाले भारतीय नागरिक निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से दूतावास से संपर्क कर सकते हैं।
+977–980 860 2881 (व्हाट्सएप पर भी)
+977–981 032 6134 (व्हाट्सएप पर भी)
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि हम कल से नेपाल में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और कई युवाओं की जान जाने से बहुत दुखी हैं। हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं मृतकों के परिवारों के साथ हैं। हम घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। बयान में आगे कहा गया कि एक करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में, हम उम्मीद करते हैं कि सभी संबंधित पक्ष संयम बरतेंगे और शांतिपूर्ण तरीकों व बातचीत के माध्यम से मुद्दों का समाधान करेंगे।

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ओली ने दबाव में दिया इस्तीफा
73 वर्षीय प्रधानमंत्री ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वह ‘समस्या का समाधान निकालने और संविधान के अनुसार राजनीतिक रूप से इसे सुलझाने में मदद करने’ के लिए पद छोड़ रहे हैं। सेना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अपील जारी कर नागरिकों से ओली के इस्तीफे के बाद ‘संयम बरतने’ का आग्रह किया।इसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी इस्तीफा दे दिया।
गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में शपथ लेने के बाद अपना चौथा कार्यकाल पूरा कर रहे ओली ने मंगलवार को सभी दलों की बैठक बुलाई थी और शांति बनाए रखने का आह्वान किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हिंसा ‘राष्ट्र के हित में नहीं है’ और अशांति के लिए ‘विभिन्न स्वार्थी केंद्रों से घुसपैठ’ को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों, जो विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहे थे, पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा।

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