पटना में NEET छात्रा मौत मामले में CBI को नहीं मिले ठोस सबूत, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल

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October 7, 2026

पटना में NEET छात्रा मौत मामले में CBI को नहीं मिले ठोस सबूत, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल

पटनाः बिहार के चर्चित नीट छात्रा मौत कांड की जांच सीबीआई ने पूरी कर ली। दिल्ली सीबीआई टीम ने मंगलवार को पटना स्थित पॉक्सो की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट (अंतिम प्रपत्र) दाखिल की। पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर 13 अक्टूबर को सुनवाई करेंगे, जिसमें इस कांड के सूचक का पक्ष भी सुना जाएगा। पॉक्सो कोर्ट ने सूचक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी करने वाली जहानाबाद की छात्रा छह जनवरी, 2026 को बेहोश मिली थी। 11 जनवरी, 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों दुष्कर्म और हत्या के आरोप लगाये थे।

CBI को नहीं मिला मौत का कारण या दोषी
सीबीआइ ने मंगलवार को पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद के अनुसार, जांच एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाया जा सके।

13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी।कोर्ट ने मामले के सूचक यानी छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है।

हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी छात्रा
मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है।यहां जहानाबाद की रहने वाली छात्रा NEET प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही थी।6 जनवरी 2026 को वह हॉस्टल के एक बंद कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी।

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इलाज के दौरान छात्रा की हो गयी थी मौत
बेहोशी की हालत में मिलने के बाद छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। छात्रा के पिता ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी और दुष्कर्म के प्रयास की आशंका भी जतायी थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बढ़ा था मामला
छात्रा की मौत के बाद पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच से जुड़े निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया था। जांच के दौरान शारीरिक चोट और दुष्कर्म की आशंका से जुड़े बिंदुओं की भी जांच की गयी।अंडरगारमेंट से स्पर्म मिलने की बात भी सामने आयी थी।

DNA जांच में नहीं मिला मेल
मामले की जांच के दौरान छात्रा के परिजनों और उसके करीबियों के DNA सैंपल लिये गये थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसी भी सैंपल का मिलान अंडरगारमेंट पर मिले स्पर्म से नहीं हुआ। इसके बाद भी पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच जारी रखी।

दो पुलिस अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई
मामले में जांच के शुरुआती स्तर पर लापरवाही के आरोप भी लगे थे।तत्कालीन चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित किया गया था। हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

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सरकार ने CBI को सौंपी थी जांच
छात्रा की मौत के बाद मामले को लेकर पुलिस की जांच पर सवाल उठे और विवाद बढ़ा. इसके बाद बिहार सरकार ने मामले की जांच CBI से कराने की सिफारिश की. फरवरी 2026 में CBI ने जांच शुरू की और पटना के हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की.

छह अक्टूबर को जांच पूरी कर दाखिल की रिपोर्ट
कई महीनों की जांच के बाद CBI ने 6 अक्टूबर 2026 को अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अब इस रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।

क्या होती है क्लोजर रिपोर्ट
क्लोजर रिपोर्ट को फाइनल रिपोर्ट या FR भी कहा जाता है। जांच एजेंसी तब ऐसी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करती है, जब उसे FIR में लगाए गये आरोपों के संबंध में किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त या ठोस साक्ष्य नहीं मिलते। हालांकि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने भर से मामला अपने आप खत्म नहीं हो जाता।

क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट के पास क्या विकल्प
अदालत जांच एजेंसी की रिपोर्ट को स्वीकार कर मामले को बंद कर सकती है।इसके अलावा कोर्ट जरूरत महसूस होने पर आगे या दोबारा जांच का आदेश भी दे सकती है।अदालत जांच एजेंसी की राय से असहमत होकर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है।

परिजनों को मिल सकता है विरोध का अधिकार
क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से पहले शिकायतकर्ता या पीड़ित पक्ष को नोटिस दिया जाता है। छात्रा के पिता इस रिपोर्ट का विरोध करते हुए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों और दलीलों के आधार पर आगे का निर्णय लेगी।

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मामले की पूरी टाइमलाइन
6 जनवरी 2026: पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बंद कमरे में NEET की तैयारी कर रही छात्रा अचेत अवस्था में मिली।

9 जनवरी 2026: छात्रा के पिता ने दुष्कर्म की आशंका जताते हुए चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी।

11 जनवरी 2026: इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गयी. इसके बाद मामले को लेकर छात्रों और परिजनों में आक्रोश बढ़ा।

जनवरी 2026: मामले की जांच के लिए IG जितेंद्र राणा के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया. मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्षों के बाद जांच का दायरा बढ़ा।

फरवरी 2026: बिहार सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की. इसके बाद CBI ने अपनी जांच शुरू की।

6 अक्टूबर 2026: CBI ने जांच पूरी करने के बाद विशेष पॉक्सो अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।

अब आगे क्या होगा
फिलहाल इस मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट के बाद गेंद अदालत के पाले में है। 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय कर सकता है। छात्रा के परिजनों को नोटिस मिलने के बाद वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति भी अदालत के सामने रख सकते हैं।

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