लोहरदगा : रविवार को आयोजित आदिवासी महोत्सव में झारखंड कैडर की आईआरएस अधिकारी निशा उरांव शामिल हुईं। कार्यक्रम में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और उसके संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। बार-बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनका नाम जोड़े जाने को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है। निशा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण की लड़ाई लड़ रहा है। यह एक तरह का पारंपरिक उलगुलान है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर आरएसएस भी अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए एक प्रकार की मुहिम चलाता है। ऐसे में दोनों के बीच विचारधारा की समानता हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह भी अपनी परंपरा को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और हमलोग भी अपनी परंपरा के लिए उलगुलान कर रहे हैं। शायद इसी विचारधारा की समानता के कारण मेरा नाम आरएसएस के साथ जोड़ा जाता है। खुद को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाने के सवाल पर निशा उरांव ने कहा कि लोहरदगा जैसे क्षेत्र को एक सशक्त नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को भी इस क्षेत्र से आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट रुप से कहा कि उनके जैसे लोगों को किसी पद का लालच नहीं है। वह आज भी समाज से जुड़कर काम कर रही हैं और बिना किसी पद के समाज की सेवा कर रही हैं। आगे भी वह इसी तरह मजबूती के साथ समाज से जुड़कर लोगों के लिए काम करती रहेंगी। आदिवासी महोत्सव में झारखंड कैडर की आईआरएस अधिकारी निशा उरांव के अलावा विधायक डा. रामेश्वर उरांव के पुत्र समाजसेवी एवं कांग्रेसी नेता रोहित प्रियदर्शी सहित कई लोग शामिल हुए।






