सुपुर्दूे खाक हो चुके हैं शहीद इम्तियाज, भद्द पिटने के बाब नीतीश कुमार परिवार से मिलने जाएंगे छपरा

BSF Imtiyaz

पटना/नारायणपुर: हम सीमा प्रहरी दो भाई हैं इसलिए घर का नाम ‘सीमा प्रहरी’ रख दिया गया है -यह कहते हैं शहीद इम्तियाज के भाई मुस्तफा बिलखने लगते हैं। कितनी मोहब्बत से उन्होंने अपने घर का नाम सीमा प्रहरी रखा था । एक प्रहरी देश के लिए कुर्बान हो चुका है और दूसरा भाई सीमा से छुट्टी लेकर शहीद भाई को कंधा देने पहुंचा । बीएसफ जवान मुस्तफा कहते हैं कि सीमा है तो देश बरकार रहेगा, गांव बरकार रहेगा । बिहार के नारायणपुर में लोग बिलख रहे हैं । भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं । शहीद इम्तियाज के जनाजे में गांव का कौन ऐसा शख्स था जो नहीं पहुंचा । 

शहीद इम्तियाज के घर का नाम सीमा प्रहरी

सीमा सुरक्षित है, प्रहरी शहीद हो चुका है ।  अब आपको हम क्या क्या बताएं और क्या दिखाएं । मिसाइल दिखाएं, ड्रोन दिखाएं,साहस-दुस्साहस दिखाएं , आप क्या देखना चाहेंगे । इम्तियाज़ तो शहीद हो चुके हैं । सरकार चुनाव में लगी है। भाई-परिवार ने अपना इम्तियाज़ खोया और सरकार ने रेड कारपेट तो बिछवाया लेकिन आई नहीं । इम्तियाज़ के परिवार ने ख़ुद समान उठाया और छपरा के उस गाँव में चले गए जिस घर का नाम है सीमा प्रहरी ।  कई लोग सोच में पड़ जाएंगे भला कोई अपने घर का नाम भी सीमा प्रहरी रखता है । लेकिन इम्तियाज़ और मुस्तफा ने घर का नाम सीमा प्रहरी रखा। मुसलमान है लेकिन बीएसएफ में दो-दो भाई हैं। दोनों भाईयों ने सीमा की सुरक्षा इतनी मोहब्बत थी की घर का नाम ही सीमा प्रहरी रख दिया । सीमा बच गई, प्रहरी शहीद हो गया।

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श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे सीएम नीतीश कुमार

अब देश पूछ रहा है कि सियासत के लिए कभी पुलवामा के शहीद को कंधा देने पहुंचे सुशासन बाबू नीतीश कुमार के कंधे में अब क्या दर्द उठा है कि शहीद इम्तियाज़ की शहादत के बाद श्रद्धांजलि तक देने नहीं पहुंचे । बिहार में दो एक सीएम दो-दो डिप्टी सीएम हैं । सब चुनाव में लगे हैं । सीमा का प्रहरी शहीद हो रहा है और उन्हें अपनी सियासत की चिंता है ।

अब नीतीश कुमार जाएंगे छपरा

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बिहार सरकार ने शहीद इम्तियाज का नहीं किया सम्मान?

बिहार के छपरा के छोटे से गाँव में एकमात्र ऐसा घर जिसका पता बच्चे-बच्चे को ज़ुबानी याद है । लोग कह रहे थे भला कोई अपने घर का नाम सीमा प्रहरी रखता है। इम्तियाज़ तो शहीद हो चुके हैं । युद्ध में जीत और हार होती है मगर शहादत का सम्मान , समाज और सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होती है । क्या पटना के मौसम का मिज़ाज इतना गर्म था एक सीएम- दो डिप्टी सीएम होने के बावजूद कोई नहीं पहुंचा । भिजवा दिया लाल कारपेट, ताकि श्रद्धांजलि रस्म पूरी की जा सके । कहने के लिए कहा जा सकता है कि हां आए थे मंत्री श्रवण कुमार, नितिन नवीन और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव..मगर सीमा सुरक्षा बल के सीमा प्रहरी के बाशिंदे इम्तियाज़ की आत्मा को सुशासन बाबू के दर्शन नहीं हो सके.. इसलिए आर्मी की गाड़ी में समान लादा गया. और आर्मी की गाड़ी में रवाना कर दिया गया पटना से छपरा.

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शहीद इम्तियाज के जनाजे में उमड़ी भीड़

शहीद इम्तियाज़ का शव जैसे ही छपरा उसके नारायणपुर पहुंचा बिलखने लगा पूरा गाँव.. औरतें-बच्चे-जवान सब निकल पड़े सीमा प्रहरी के बाशिंदे को देखने… उस जवान को देखने जिसने अपनी शहादत उस वक्त दी जब देश सबसे मुश्किल घड़ियों से गुज़र रहा था । इम्तियाज़ के छोटे भाई मुस्तफा भी बांग्लादेश सीमा पर तैनात हैं दस मई की रात पाकिस्तानी ड्रोन की अटैक में उन्हें गंभीर चोट आई जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। नारायणपुर गाँव में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ गुस्सा तो है लेकिन सरकार के प्रति नाराजगी भी है और इस नाराजगी की वजह किसी से छिपी नहीं । इम्तियाज़ की शहादत को सलाम है । नारायणपुर गाँव भारत के नक्शे पर जब याद किया जाएगा तो लोग सीमा प्रहरी के बाशिंदे को नहीं भूल पाएंगे जिन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

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