दुमकाः कोर्ट ने गुरुवार को केस नंबर 110/2022 से जुड़ा जमीन विवाद का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पूर्व सांसद फुरकान अंसारी और झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को बाइज्ज़त बरी कर दिया।दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनने के अदालत ने सुलह समझौते के आधार पर साक्ष्य के अभाव में नामजद आरोपी झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री सह जामताड़ा के कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी, उनके पिता पूर्व सांसद फुरकान अंसारी और सत्तार करम को रिहा करने का फैसला सुनाया।इस निर्णय के बाद पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई और समर्थकों ने मिठाइयाँ बाँटकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
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इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी समेत तीन अन्य की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद राजा खान ने बहस में हिस्सा लिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता से मिली जानकारी के अनुसार देवघर जिले के मधुपुर के रहने वाले मो मकबुल हुसैन की ओर से मधुपुर कोर्ट में तीनों के विरुद्ध 2015 में किराये का घर खाली कराने के विवाद को लेकर परिवाद वाद दाखिल किया गया था। देवघर जिले के मधुपुर न्यायालय में कई वषों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद इस मामले को 2022 में दुमका की एमपी, एमएलए की विशेष अदालत में स्थानांतरित किया गया ।
इस मामले में चली सुनवाई के बाद गुरुवार को उक्त न्यायालय द्वारा यह फैसला सुनाया गया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने न्यायालय के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा था। मैं कोर्ट का दिल से धन्यवाद करता हूं। मेरे पिताजी, जिन्होंने झारखंड अलग राज्य के लिए बड़ी कुर्बानी दी। उन्हें भी इस केस में घसीटने का काम किया गया। लेकिन आज सच सामने आ गया और कोर्ट ने हमें बाइज्जत बरी कर दिया।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा:
“हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा था। मैं कोर्ट का दिल से धन्यवाद करता हूँ। मेरे पिताजी, जिन्होंने झारखंड अलग राज्य के लिए बड़ी कुर्बानी दी, उन्हें भी इस केस में घसीटने का काम किया गया। लेकिन आज सच सामने आ गया और कोर्ट ने हमें बाइज्ज़त बरी कर दिया।” उन्होंने आगे कहा:“2022 से मुझे बार-बार इस केस में दुमका आना पड़ रहा था। आज न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला निराधार था। यह न्याय और सत्य की जीत है।”




