बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, कहा- रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा प्रशासन ने कैसे होने दिया

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, कहा- रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा प्रशासन ने कैसे होने दिया

रांचीः नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिख है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में जिला प्रशासन द्वारा रिम्स की जमीन पर अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है।इस मामले में मेरा स्पष्ट रूप से कहना है हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अवैध निर्माण को तोड़ा जाए और उक्त जमीन को रिम्स को सौंपा जाए। लेकिन सवाल यह है कि उक्त प्रसंगगत जमीन पर अवैध कब्जा जिला प्रशासन द्वारा कैसे होने दिया गया? हद तो तब हो गई जब रिम्स की उक्त जमीन का कुछ भाग फर्जी कागज बनाकर बाजार में बेच दिया गया और बिल्डरों ने उक्त जमीन पर अपार्टमेंट बनाकर आम नागरिकों के हाथों फ्लैट बेच दिया।

JSSC CGL का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हाईकोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती
आम नागरिकों के पास जमीन की इतनी समझ नहीं होती
यह भी सच है कि जब कोई आम नागरिक फ्लैट या जमीन खरीदता है तो यह उनकी जिम्मेवारी नहीं होती है कि जमीन की जांच करें कि जमीन सरकारी या निजी है। आम नागरिक के पास न इतनी समझ होती है और न ही इतने संसाधन कि हर स्तर पर कानूनी जांच पड़ताल कर सके। यह जिम्मेवारी सरकार के सिस्टम की होती है।

मुश्ताक अली ट्रॉफी पर पहली बार झारखंड का कब्जा, ईशान किशन की कप्तानी में बना चैंपियन

बाबूलाल मरांडी द्वारा हेमंत सोरेन को लिखी गई चिट्ठी

माननीय मुख्यमंत्री जी,
आप अवगत होंगे कि RIMS की जमीन, जो DIG ग्राउण्ड के नाम से जानी जाती है, के मामले में माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची द्वारा हाल ही में आदेश दिया गया कि DIG ग्राउण्ड को अतिक्रमण मुक्त कराते हुए रिम्स प्रबंधन को कब्जा एवं हस्तगत कराया जाय।
माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड के आदेश के आलोक में जिला प्रशासन द्वारा रिम्स की जमीन पर अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है, और इस मामले में मेरा स्पष्ट रूप से कहना है कि माननीय न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए अवैध निर्माण को तोड़ा जाय और उक्त जमीन को रिम्स को सौंपा जाय, लेकिन सवाल यह है कि उक्त प्रसंगगत जमीन पर अवैध कब्जा जिला प्रशासन द्वारा कैसे होने दिया गया ? हद तो तब हो गई जब रिम्स की उक्त जमीन का कुछ भाग फर्जी कागज बनाकर बाजार में बेच दिया गया और बिल्डरों ने उक्त जमीन पर अपार्टमेन्ट बनाकर आम नागरिकों के हाथों फ्लैट बेच दिया।
यह सब जानकर मुझे आभास होता है कि निश्चित रूप से छवि रंजन जैसे भ्रष्ट IAS और कोई होंगे जिन्होंने सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर बेच दिया।
यह सत्य है कि जब कोई आम नागरिक फ्लैट या जमीन खरीदता है तो यह उनकी जिम्मेवारी नहीं होती है कि जमीन की जाँच करें कि जमीन सरकारी या निजी है। आम नागरिक के पास न इतनी समझ होती है और न ही इतने संसाधन कि हर स्तर पर कानूनी जाँच पड़ताल कर सके। यह जिम्मेवारी सरकार के सिस्टम की होती है।
मैं, आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ :-
1. कि क्या इस तरह के कारनामों के लिए आपका यह भ्रष्ट सिस्टम जिम्मेवार नहीं है ?
2. कि रिम्स की उक्त जमीन को दूसरे के नाम रजिस्ट्री कैसे कर दी गई जबकि खरीदते या बेचते समय हर स्तर से जाँच की जाती है इतना ही नहीं दाखिल-खारिज (Mutation) करते वक्त भी जाँच-पड़ताल की जाती है। इसका मतलब है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार ने रिश्वत लेकर जमीन की रजिस्ट्री कर दी।
3. कि रजिस्ट्री के बाद उक्त जमीन का दाखिल-खारिज कैसे हो गया ? दाखिल-खारिज में सम्बन्धित अंचलाधिकारी की पूरी जिम्मेदारी होती है कि जाँच-पड़ताल कर ही Mutation किया जाय। आखिर CO ने ऐसा कारनामा क्यों किया ?
4. कि अवैध रूप से रजिस्ट्री और Mutation के बाद राँची नगर निगम ने अपार्टमेन्ट निर्माण हेतु नक्शा पास कर दिया जबकि नक्शा पास करते समय सम्बन्धित जमीन का पूरा ब्यौरा एवं दस्तावेज की जाँच की जाती है। इससे साफ-साफ मालूम होता है कि सिस्टम का कोई शीर्षस्थ व्यक्ति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर यह सब कुकृत्य कराया।
5. कि राँची नगर निगम द्वारा नक्शा पास करने के बाद RERA की जिम्मेवारी बनती है कि जाँच-पड़ताल कर ही प्रोेजेक्ट का Approval दिया जाय लेकिन RERA द्वारा भी नियमों को नजरअंदाज कर प्रोजेक्ट का Approval कर दिया गया।
विगत दो-तीन दिनों से प्रमुख समाचार-पत्रों में इससे संबंधित खबरें प्रकाशित हुई हैं और सरकार के तंत्र पर उठाया है, लेकिन जिम्मेवार विभागों या पदाधिकारियों द्वारा इसका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। प्रकाशित समाचारों की छायाप्रति आपके सुलभ संदर्भ हेतु संलग्न है।
यह पूरा मामला स्पष्ट करता है कि यह सिर्फ फर्जीवाड़ा तरीके से सरकारी जमीन को बेचकर अवैध निर्माण कराने का ही नहीं ब्लकि सरकारी तंत्र में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार का ही परिणाम है।
अतएव मैं, आपसे माँग करता हूँ कि:-
1. इस पूरे प्रकरण में शामिल संबंधित रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी (CO) और रांची नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल थ्प्त् दर्ज की जाए और उन्हें तुरंत निलंबित कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
2. जिन निर्दोष लोगों ने उक्त अवैध तरीके से निर्मित अपार्टमेन्ट में फ्लैट खरीदे हैं, उन्हें सरकार तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराएँ।
3. यदि सरकार वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हो तो फ्लैट खरीददारों को क्रय मूल्य सरकार वहन करें क्योंकि यह नुकसान सरकार के भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हुआ है, आम जनता की गलती से नहीं।
सधन्यवाद!
संलग्नक:- यथोक्त।
सेवा में,                                            आपका
(बाबूलाल मरांडी)
सेवा में ,
श्री हेमन्त सोरेन जी,
माननीय मुख्यमंत्री,
झारखण्ड सरकार, राँची।
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now