उत्पाद सिपाही परीक्षा में सेंध लगाने वाला अतुल वत्स गिरफ्तार, बिहार सहित कई राज्यों में पेपर लीक मामले में आ चुका है नाम

उत्पाद सिपाही परीक्षा में सेंध लगाने वाला अतुल वत्स गिरफ्तार, बिहार सहित कई राज्यों में पेपर लीक मामले में आ चुका है नाम

रांचीः झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा का में पेपर लीक की कोशिश रांची पुलिस ने नाकाम कर दी। इस मामले में एक संगठित गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मास्टरमाइंड अतुल वत्स समेत 164 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें 5 सदस्य गिरोह के हैं, जबकि 159 परीक्षा के अभ्यर्थी है। गिरफ्तार अभ्यर्थियों में सात महिलाएं है।

रांची में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की बड़ी साजिश नाकाम, 159 अभ्यर्थी सहित 164 गिरफ्तार
बिहार के जहानाबाद का रहने वाले अतुल वत्स के साथ, पटना के माल सलामी का विकास कुमार, रामगढ़ के मांडू का आशीष कुमार, मांड का योगेश प्रसाद, दिलदार नोनिया, केदला और बिहार के पूर्वी चंपारण का मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह गिरफ्तार किया गया है। मास्टमाइंड अतुल वत्स का आपराधिक नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि वह राजस्थान क्लर्क भर्ती 2017, नीट 2024, बिहार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती 2024, उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2024 जैसे मामलों में संलिप्त रहा है। पुलिस अब उसके नेटवर्क, एजेंट और फाइनेंशियलय ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।

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अतुल वत्स को रांची पुलिस ने उत्पाद विभाग सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कराने और ठगी की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। साजिश में अतुल के साथ गया का गौरव और हरियाणा का मोहित भी शामिल है। पुलिस ने 159 अभ्यर्थियों को भी हिरासत में लिया है, जिनमें कई बिहार के हैं। अतुल मूल रूप से जहानाबाद का है, जो पटना के बुद्धा कॉलोनी (2020) और दानापुर (2022) थानों में दर्ज पेपर लीक में मुख्य आरोपी है। सूत्रों के मुताबिक, अतुल का सिंडिकेट बिहार के माफियाओं के दम पर चल रहा था। झारखंड के माफिया भी शामिल होना चाहते थे, लेकिन अतुल ने उन्हें साथ नहीं लिया। इसी आपसी रंजिश में पूरी साजिश का भंडाफोड़ हो गया।
अतुल वत्स, विशाल चौरसिया और बिजेंद्र गुप्ता जैसे चेहरों का नाम बिहार सहित कई राज्यों के पेपर लीक में आ चुका है। इनका पूरा सिंडिकेट एक संगठित गिरोह की तरह काम करता है। आश्चर्य है कि पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इन पर बीएनएस की धारा 111 और 112 (संगठित अपराध) के तहत केस दर्ज क्यों नहीं किया गया? – प्रभात भारद्वाज, अधिवक्ता, पटना हाईकोर्ट

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