रांचीः रविवार को रांची के मोरहाबादी मैदान में हुए आदिवासी एकता महाजुटान रैली में पूर्व मंत्री बंधू तिर्की खूब गरजे और उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। आदिवासी एकता महाजुटान में परिसीमन, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। पूर्व विधायक बंधु तिर्की और झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।
✅ यही वह ताकत है हमारी…..
जो हमेशा ही जनहित के प्रति समर्पित होकर बिना किसी भेदभाव के सभी की सेवा, विकास और सभी के प्रति समर्पित होकर राजनीतिक जीवन जीने और अपना उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा देती है.✅ आज राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता… pic.twitter.com/r6JJDwrD8g
— BANDHU TIRKEY (@bandhu_tirkey) August 30, 2026
झारखंडी ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश
पूर्व विधायक बंधु तिर्की ने कहा कि यह लड़ाई केवल लोकसभा और विधानसभा सीटों को बचाने की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की पहचान और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

झारखंड को 'नागपुर' बनाने का प्रयास
उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें झारखंड को "नागपुर" बनाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन यह भगवान बिरसा मुंडा और वीर बुधु भगत की धरती है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर गांव-गांव में लोगों को लड़ाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में विभिन्न जाति और समुदाय के लोग वर्षों से सहिया, कर्म और सामाजिक रिश्तों के साथ मिलकर रहते आए हैं।
जनसंख्या के आधार पर अधिकार घटाने की कोशिश
परिसीमन के मुद्दे पर बंधु तिर्की ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर झारखंड में आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी घटाने की कोशिश की गई, तो इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची के तहत मिले अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा।उन्होंने पेसा कानून, मनरेगा और आदिवासी हितों से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को संगठित रहना होगा।
महाजुटान में विकास मुंडा का पहुंचना महत्वपूर्ण
आदिवासी समुदाय के इस महाजुटान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह खुद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) विधायक विकास कुमार मुंडा प्रतिनिधि के तौर पर कार्यक्रम में पहुंचे। मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी के बीच उनके प्रतिनिधि के तौर पर विकास मुंडा का महाजुटान में पहुंचना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महाजुटान का मुख्य मुद्दा आदिवासी हितों से जुड़े सवालों के साथ-साथ प्रस्तावित परिसीमन का विरोध रहा। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से प्रतिनिधि भेजे जाने को आदिवासी समाज के इस बड़े आयोजन के प्रति सरकार की मौजूदगी के तौर पर देखा जा रहा है।







