लोहरदगा: हिंडालकों कंपनी प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने श्रमिकों की उपेक्षा का मुद्दा उठाया है। BMS प्रतिनिधियों, प्रबंधन और ठेकेदार पंचम उरांव के बीच आयोजित बैठक में श्रमिकों से जुड़ी कई समस्याओं पर चर्चा हुई, जिसके बाद प्रबंधन को कुछ मांगों पर सहमति देनी पड़ी।



बैठक में यह तथ्य सामने आया कि श्रमिकों को लंबे समय से पर्याप्त मात्रा में आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। श्रमिक संगठन के विरोध के बाद प्रबंधन ने व्यवस्था में बदलाव का आश्वासन दिया। इसके अलावा कई कर्मचारियों के आईडी कार्ड केवल ब्लड टेस्ट लंबित होने के कारण नहीं बन पाने का मामला भी बैठक में उठा, जिसे संगठन ने प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया।

BMS नेताओं ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ रहा है। यदि भविष्य में भी कर्मचारियों की मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगा।
बैठक में प्रबंधन की ओर से चिन्मय दास (AGM-HR) एवं अभिनव कुमार (यूनिट HR) उपस्थित थे। वहीं BMS की ओर से राजवंश सिंह एवं विक्रम शरण ने श्रमिकों का पक्ष रखा। ठेकेदार पक्ष का प्रतिनिधित्व पंचम उरांव ने किया।

बैठक के दौरान श्रमिक हितों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है, लेकिन श्रमिकों का कहना है कि केवल बैठकों और आश्वासनों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाने से ही उनकी समस्याओं का समाधान संभव होगा। अब यह देखना होगा कि प्रबंधन अपने वादों को कितनी गंभीरता से लागू करता है।






