गिरिडीहः झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को अब तक की बड़ी सफलताओं में से एक सफलता हाथ लगी है। झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने 25 लाख रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर उर्फ बासुदेव को गिरफ्तार कर लिया है। वर्षों से पारसनाथ और सारंडा के जंगलों में सक्रिय यह हार्डकोर नक्सली झारखंड पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी को झारखंड समेत पूर्वी भारत के नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव निवासी अजय महतो लंबे समय से पारसनाथ , सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था। झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की पुलिस भी उसकी तलाश में जुटी थी। उस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
खुफिया सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने गिरिडीह जिले के हरलाडीह गांव में करमू मांझी के घर पर छापेमारी की। इसी दौरान घर में छिपे अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया गया। अभियान के दौरान उसके साथ मौजूद दो अन्य नक्सलियों को भी दबोच लिया गया। तीनों से विशेष जांच टीम गहन पूछताछ कर रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अजय महतो एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा के हेडक्वार्टर का हार्डकोर सदस्य था। वह आईईडी (IED) विस्फोटक तैयार करने और बेहद कम समय में जंगलों व सड़कों पर विस्फोटक प्लांट करने में माहिर माना जाता था। सुरक्षाबलों के लिए वह लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ था।
अजय महतो पर गिरिडीह के पचंबा स्थित होमगार्ड बैरक से हथियार लूटने, कैदी वाहन पर हमला कर नक्सलियों को छुड़ाने, लेवी वसूली के लिए हत्या, वाहनों में आगजनी, पंचायत समिति सदस्य समशेर जंगी की हत्या तथा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के पुत्र की हत्या सहित कई सनसनीखेज घटनाओं में संलिप्त रहने के आरोप हैं।
पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), बोकारो, धनबाद, हजारीबाग समेत कई जिलों में हत्या, लूट, लेवी वसूली, पुलिस बल पर हमले, आईईडी विस्फोट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे 240 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। उसने गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और हजारीबाग के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई बड़ी नक्सली वारदातों को अंजाम दिया था।
अजय महतो का नाम वर्ष 2012 में मधुबन स्थित भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के तत्कालीन महाप्रबंधक पीसी शर्मा की हत्या के चर्चित मामले में भी सामने आया था। इस मामले में वह लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार अभियान चला रही थी।
बताया जा रहा है कि सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद अजय महतो सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पारसनाथ क्षेत्र में सक्रिय था। इसी दौरान झारखंड पुलिस ओर सीआरपीएफ को उसकी मौजूदगी की सटीक सूचना मिली और संयुक्त अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।अजय महतो की गिरफ्तारी से नक्सली संगठन की गतिविधियों, हथियारों की आपूर्ति, लेवी नेटवर्क और शीर्ष कमांडरों से जुड़े कई अहम राज खुल सकते हैं। उससे पूछताछ के आधार पर आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


