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झारखंड के जमीन घोटाला में ACB का एक्शन, 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

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Live Dainik

August 10, 2025

झारखंड के जमीन घोटाला में ACB का एक्शन, 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

डेस्कःझारखंड के हजारीबाग जिले में खासमहल भूमि से जुड़े घोटाले में एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर ली है। एसीबी की एफआईआर में तत्कालीन खास महल पदाधिकारी विनोद चंद्र झा के साथ-साथ जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल बसंती सेट्ठी, उमा सेट्ठी, इंद्रजीत सेट्ठी, राजेश सेट्ठी, विजय प्रताप सिंह व सुधीर कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है।

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एसीबी हजारीबाग में पोस्टेड डीएसपी सुमित सौरभ लकड़ा के बयान पर एजेंसी ने केस दर्ज किया है। खासमहल घोटाले में साल 2015 में पीई दर्ज की गई थी। इस केस में गड़बड़ी पाए जाने के बाद एसबी ने सरकार से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। ये घोटाला तत्कालीन हजारीबाग डीसी व आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के कार्यकाल से जुड़ा रहा था।

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क्या है मामला
पूरा मामला हजारीबाग की 2.75 एकड़ खासमहल भूमि से संबंधित है, जिसे 1948 में 30 वर्षों के लिए सेवायत ट्रस्ट को लीज पर दिया गया था। खासमहल जमीन की लीज 1978 में समाप्त हो गई थी और 2008 तक इसका नवीकरण किया गया। लेकिन 2008-10 के बीच एक सुनियोजित प्रशासनिक षड्यंत्र के तहत इस भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर 23 निजी व्यक्तियों को आवंटित कर दिया गया। आरोप है कि इस षड्यंत्र के केंद्र में तत्कालीन डीसी की भी भूमिका थी। उन्होंने खासमहल पदाधिकारी के साथ मिलकर लीज नवीनीकरण के लिए दिए गए आवेदन से सेवायत शब्द जानबूझकर हटवाया, ऐसा इसलिए किया गया, ताकि ट्रस्ट भूमि को सरकारी दिखाया जा सके और उसका अवैध रूप से हस्तांतरण संभव हो सके। ट्रस्ट की इस संपत्ति को निजी लाभ के लिए बेचने के लिए फर्जी तरीके से पॉवर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल किया गया। विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह नामक व्यक्तियों को पावर ऑफ अटॉर्नी धारक बनाया गया, जिनके माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया न केवल न्यायालय की अवहेलना थी, बल्कि ट्रस्ट की संपत्ति का निजी दोहन कर उसे व्यावसायिक लाभ में बदलने की एक सुनियोजित साजिश थी।

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इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना की बात भी एसीबी ने पायी थी। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि हीरालाल सेठी और पन्नालाल सेठी अथवा उनके उत्तराधिकारी ट्रस्ट की भूमि को किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं कर सकते। इसके बावजूद, इस आदेश को नजरअंदाज करते हुए राजस्व विभाग के आदेश संख्या 1346/रा(15 मई 2010) और डीसी आदेश संख्या 529/खाम (14 सितंबर 2010) के माध्यम से इस भूमि को 23 व्यक्तियों को आवंटित कर दिया गया। वर्तमान में इस भूमि पर बहुमंजिला व्यावसायिक भवन खड़े हैं।

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