रांची के पिठौरिया पोस्ट ऑफिस के डाकिया ने सालभर नहीं बांटी डाक, बोरियों में बंद मिले आधार, पैन कार्ड और कोर्ट नोटिस

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July 5, 2026

रांची के पिठौरिया पोस्ट ऑफिस के डाकिया ने सालभर नहीं बांटी डाक, बोरियों में बंद मिले आधार, पैन कार्ड और कोर्ट नोटिस

रांचीः कांके प्रखंड के पिठोरिया पोस्ट ऑफिस के डाकिया विकास कुमार की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आरोपी डाकिया ने पिछले एक साल से जनता की डाक बांटने के बजाय आधार कार्ड, पैन, एटीएम और कोर्ट के जरूरी नोटिस बोरों में भरकर अपने घर में छिपा रखा था। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार डाक नहीं मिलने की शिकायत के बाद पुलिस द्वारा शनिवार को की गई जांच में डाकिया के घर से बोरों में बंद सैकड़ों महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य सरकारी पत्र शामिल थे।सबसे गंभीर बात यह रही कि कई लोगों के नाम जारी लोक अदालत और आयकर विभाग के नोटिस भी इन बोरों में बंद मिले। समय पर नोटिस नहीं मिलने के कारण कई लोगों को आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों में नाराजगी
मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से डाक नहीं मिलने के कारण उन्हें विभिन्न सरकारी और बैंकिंग कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।कई लोगों को यह भी जानकारी नहीं थी कि उनके नाम से महत्वपूर्ण दस्तावेज और नोटिस जारी किए गए हैं। ग्रामीण ब्रज किशोर साहू ने बताया कि पिछले एक साल से उनके क्षेत्र में नियमित रूप से डाक वितरण नहीं हो रहा था। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया।
डाकिया निलंबित, होगी विभागीय कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए डाक विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित डाकिया को निलंबित कर दिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
विशेष अभियान चलाकर बांटी जाएगी डाक
डाक विभाग ने प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत बोरों में पड़ी सभी डाक और दस्तावेजों की छंटनी कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर संबंधित लोगों तक पहुंचाया जाएगा।पिठोरिया का यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है। ऐसे समय में जब डिजिटल सेवाओं और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया जा रहा है, एक साल तक महत्वपूर्ण डाक का लोगों तक नहीं पहुंचना विभागीय जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

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