डेस्कः मोदी सरकार ने झारखंड को रेल परियोजनाओं को लेकर एक बड़ी सौगात दी है। हालांकि इस सौगात से सिर्फ झारखंड को ही फायदा नहीं होगा बल्कि देश को भी फायदा होगा। केंद्र की इस पहल से न केवल कार्बन का उत्सर्जन कम होगा बल्कि सालाना 32 करोड़ लीटर डीजल की भी बचत होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे कोडरमा-बरकाकाना मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट पर कम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट की वजह से जो कार्बन डाई ऑक्साईड की बचत होगी, वह 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। इतना ही नहीं, इस परियोजना की वजह से देश को 32 करोड़ लीटर डीजल की सालाना बचत होगी।
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वैष्णव ने कहा कि इस परियोजना से 938 गांवों की 15 लाख आबादी को फायदा होगा। इतना ही नहीं, इस मार्ग से अतिरिक्त 30.4 मिलियन टन माल की ढुलाई संभव हो जायेगी। इससे पर्यावरण को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि अगर इतने माल की ढुलाई सड़क मार्ग से की जाये, तो बड़ी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होगा। अश्विनी वैष्णव केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद में लिये गये फैसलों के बारे में जानकारी दे रहे थे।
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अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 133 किलोमीटर लंबा कोडरमा-बरकाकाना (अरीगडा) डबलिंग प्रोजेक्ट एक बड़ी परियोजना है। इस परियोजना पर कुल 3,063 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह रांची और पटना के बीच सबसे छोटी लाइन है। इस परियोजना के पूरी हो जाने के बाद कोडरमा, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जिलों की कनेक्टिविटी बढ़ जायेगी।
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स्वीकृत परियोजनाओं में से एक 133 किलोमीटर लंबे कोडरमा-बरकाकाना ट्रैक के दोहरीकरण से संबंधित है। यह ट्रैक न केवल झारखंड के एक प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र से होकर गुजरता है, बल्कि पटना एवं रांची के बीच का सबसे छोटा और अधिक सक्षम रेल संपर्क मार्ग भी है। दूसरी परियोजना 185 किलोमीटर लंबे बेल्लारी-चिकजाजुर ट्रैक के दोहरीकरण की है। यह ट्रैक कर्नाटक के बेल्लारी एवं चित्रदुर्ग जिलों और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से होकर गुजरता है।




