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निशा भगत की मौत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त, मीडिया रिपोर्ट का स्वतः लिया संज्ञान

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Live Dainik

November 7, 2026

निशा भगत की मौत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त, मीडिया रिपोर्ट का स्वतः लिया संज्ञान

रांचीः झारखंड में आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के मामले को राष्ट्रीय अनुसूचति जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संझान लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए झारखंड सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगने की बात कही है।आयोग यह पता लगाएगा कि किन परिस्थितियों में यह दुखद घटना हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे।

वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है। आदिवासी महिला नेता निशा भगत ने अपनी मौत से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव आकर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। इस दौरान उन्होंने कुछ लोगों पर नाम लेकर आरोप भी लगाए थे।इसके बाद उनकी मौत का मामला चर्चा में आ गया और घटना को लेकर कई सवाल उठने लगे।मामले में उनके पिता हंदू भगत ने भी पिठोरिया थाना में आवेदन देकर कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की है।

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झारखंड सरकार से मांगी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा है कि आयोग जल्द ही झारखंड के संबंधित उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करेगा। आयोग यह जानना चाहता है कि निशा भगत की मौत किन परिस्थितियों और कारणों से हुई। साथ ही घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी लेकर निष्पक्ष जांच और वास्तविक तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग आदिवासी समाज के हितों, सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।जनजातीय समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय, उत्पीड़न या अधिकारों के हनन का मामला सामने आने पर आयोग संवेदनशीलता के साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है।

वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने निशा भगत की 6 नवंबर 2026 को हुई मृत्यु से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा है कि किसी भी महिला की पीड़ा और मदद की पुकार अनसुनी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता, समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही अनिवार्य है।

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