रांचीः झारखंड में आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के मामले को राष्ट्रीय अनुसूचति जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संझान लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए झारखंड सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगने की बात कही है।आयोग यह पता लगाएगा कि किन परिस्थितियों में यह दुखद घटना हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे।
वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है। आदिवासी महिला नेता निशा भगत ने अपनी मौत से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव आकर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। इस दौरान उन्होंने कुछ लोगों पर नाम लेकर आरोप भी लगाए थे।इसके बाद उनकी मौत का मामला चर्चा में आ गया और घटना को लेकर कई सवाल उठने लगे।मामले में उनके पिता हंदू भगत ने भी पिठोरिया थाना में आवेदन देकर कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की है।
झारखंड सरकार से मांगी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा है कि आयोग जल्द ही झारखंड के संबंधित उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करेगा। आयोग यह जानना चाहता है कि निशा भगत की मौत किन परिस्थितियों और कारणों से हुई। साथ ही घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी लेकर निष्पक्ष जांच और वास्तविक तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग आदिवासी समाज के हितों, सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।जनजातीय समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय, उत्पीड़न या अधिकारों के हनन का मामला सामने आने पर आयोग संवेदनशीलता के साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है।
वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने निशा भगत की 6 नवंबर 2026 को हुई मृत्यु से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा है कि किसी भी महिला की पीड़ा और मदद की पुकार अनसुनी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता, समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही अनिवार्य है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने झारखंड के रांची में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री निशा भगत की 6 नवंबर 2026 को हुई मृत्यु से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने ऑनलाइन ट्रोलिंग, उत्पीड़न तथा स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस से जुड़ी शिकायतों को लेकर अपनी व्यथा व्यक्त की थी। उन्होंने लाइव के दौरान पिठोरिया थाना प्रभारी से भी संपर्क कर अपनी परेशानी और जीवन समाप्त करने के विचार के बारे में बताया था।
आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष, विस्तृत एवं समयबद्ध जांच, पुलिस की प्रतिक्रिया एवं कार्रवाई की समीक्षा, पूर्व में दर्ज कराई गई शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जांच तथा फेसबुक लाइव, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण को सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग ने पुलिसकर्मियों की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही या कर्तव्य में चूक पाए जाने पर जवाबदेही तय करने तथा दिवंगत के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा है।
आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है।
किसी भी महिला की पीड़ा और मदद की पुकार अनसुनी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता, समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही अनिवार्य है। #suomotu #ncw #jharkhand
— NCW (@NCWIndia) November 7, 2026






