रांची: सुप्रीम कोर्ट में झारखंड की डीजीपी नियुक्ति मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पंजाब और यूपी की नियुक्ति नियमावली के साथ-साथ झारखंड की नियुक्ति नियमावली पर न्याय मित्र से रिपोर्ट मांगी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब और यूपी की नियुक्ति नियमावली के साथ-साथ झारखंड की नियुक्ति नियमावली पर एमिकस क्यूरी से रिपोर्ट मांगी है। हालांकि एमिकस क्यूरी पूर्व में दी गई अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को बता चुके हैं कि झारखंड में सेवानिवृत्ति के एक दिन पूर्व तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाना प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहना की पीठ में डीजीपी नियुक्ति नियमावली के मुद्दे पर सुनवाई हुई। कोर्ट अब 23 नवंबर को इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
तीनों राज्यों की नियमावली पर मांगी राय
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि न्यायालय पिछली सुनवाई में कह चुका है कि झारखंड सरकार की नियमावली सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुरूप नहीं है। एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने कहा कि वह झारखंड के मुद्दे पर अपनी राय दे चुके हैं। लेकिन अन्य राज्यों द्वारा बनायी गयी डीजीपी नियुक्ति नियमावली पर अपनी राय तैयार कर चुके हैं, जिसे वह कोर्ट में पेश करेंगे। वहीं, झारखंड सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने नियमावली पर नए सिरे से शपथ पत्र दायर नहीं किए जाने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी डीजीपी नियुक्ति नियमावली बनी है, ऐसे में एमिकस क्यूरी इन तीनों राज्यों की नियमावली पर अपनी समेकित राय दें। साथ ही केंद्र सरकार भी नियमावली पर अपनी राय दे।







