रांचीः सात अक्टूबर 2026 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का रांची के अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद आठ अक्टूबर को दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार और श्राद्धकर्म किया गया। करीब दो सप्ताह तक नेमरा में रहने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन दोनों बेटों के साथ बुधवार को सड़क मार्ग से रांची लौट आए।
मां के निधन के बाद नेमरा में बिताए करीब 14 दिन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के निधन के बाद सोरेन परिवार शोक में डूब गया था।सात अक्टूबर को मां के निधन के बाद आठ अक्टूबर को मुख्यमंत्री अपनी मां के पार्थिव शरीर के साथ पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। यहां पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।मुख्यमंत्री ने स्वयं अपनी मां को मुखाग्नि दी और इसके बाद परिवार की परंपराओं के अनुरूप आगे के संस्कारों में शामिल रहे।


पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ निभाया राजधर्म
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नेमरा प्रवास केवल पारिवारिक संस्कारों तक सीमित नहीं रहा।उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन जारी रखा। पैतृक गांव में रहते हुए वे सरकारी कार्यों, प्रशासनिक गतिविधियों और जरूरी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे। संस्कार भोज के दौरान भी उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और दूर-दराज से पहुंचे लोगों से मुलाकात की।
14वें दिन नेमरा से रांची लौटे मुख्यमंत्री
मां के अंतिम संस्कार से लेकर आगे के पारंपरिक अनुष्ठानों तक परिवार के साथ समय बिताने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब अपने पैतृक गांव नेमरा से रांची लौट गए हैं। करीब दो सप्ताह तक गांव में रहकर उन्होंने अपनी मां को अंतिम विदाई देने के साथ पारिवारिक परंपराओं के अनुरूप सभी जरूरी संस्कारों में हिस्सा लिया।

कल्पना सोरेन ने बताया जड़ों और परंपराओं का महत्व
इसी बीच उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, “हमें हमेशा अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए।






