रांचीः सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में लोहरदगा जिले के 15 शिक्षकों को अतिरिक्त बताते हुए दूसरे स्कूल में स्थानांनतरित करने के मामले में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन ने याचिका पर सुनवाई करते हुए लोहरदगा के उपायुक्त को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने उपायुक्त को निर्देश दिया है कि शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन मानते हुए कानून और लागू नियमों के अनुसार उचित निर्णय लें।कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस अभ्यावेदन पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 2023 का स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, यदि वह अब तक लागू नहीं हुआ है।

मामले में शिक्षकों की ओर से पक्ष रखते हुए अदालत को बताया गया कि लोहरदगा के जिला शिक्षा अधीक्षक ने 27 जुलाई 2023 को पत्र जारी कर उन्हें अलग-अलग स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक घोषित करते हुए स्थानांतरण का आदेश दिया था। हालांकि, करीब तीन साल बीतने के बाद भी इस आदेश को लागू नहीं किया गया है।अदालत से इस आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में निजी व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका को भी चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से कहा गया कि आदेश अब तक लागू नहीं हुआ है। ऐसे में न्यायहित में संबंधित अधिकारियों को याचिका को अभ्यावेदन मानकर नियमानुसार फैसला लेने का निर्देश दिया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि शिक्षक संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।



