रांचीः झारखंड हाईकोर्ट में JPSC द्वारा आयोजित 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई आज फिर हुई।
हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट में हस्तक्षेपकर्ता और राज्य सरकार ने पक्ष रखा। हस्तक्षेप कर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने कहा कि 11-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ में परीक्षा लेने वाली एजेंसी TDPL ने 50- 50 लाख लेकर कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराया।

सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहित राय ने पक्ष रखा। उनकी ओर से सीलबंद रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने प्राथी एवं सरकार को शॉर्ट नोट प्रस्तुत करने को कहा है।
पिछली सुनवाई में JPSC की ओर से कहा गया कि परीक्षा में सिस्टमैटिक अनियमितता हुई। अनुसंधान में यह साफ हो गया कि परीक्षा की स्वच्छता भंग हुई है। नियुक्ति में यह पता लगाना असंभव है कि कौन सफल अभ्यर्थी दोषी है और कौन निर्दोष है।
कोर्ट को बताया कि CID के दस्तावेजों से साफ है कि नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। परीक्षा में अनियमितता को देखते हुए सरकार को नियुक्ति रद्द करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने पक्ष रखा। मामले में याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा-2023 (01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर (18/2023) और सीडीपीओ (21/2023) नियुक्ति को रद्द करने को चुनौती दी गई है।




